ईरान युद्ध का नया मोड़ होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका ने तबाह किए 16 ईरानी जहाज ट्रंप की चेतावनी

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News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर आ गया है। 10 मार्च 2026 को अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक बड़े सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देते हुए ईरान के 16 माइन-लेइंग (समुद्री सुरंग बिछाने वाले) जहाजों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उसने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में कोई भी रुकावट पैदा की, तो उसे "कभी न देखे गए" सैन्य परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

ऑपरेशन 'एपिक फ्युरी': अमेरिका का प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक वीडियो जारी कर इस कार्रवाई का ब्यौरा दिया है। यह हमला उस समय किया गया जब ऐसी खुफिया रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य में विस्फोटक माइंस बिछाने की तैयारी कर रहा है।

शुरुआती हमला: राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले 10 जहाजों को तबाह करने की जानकारी दी थी, जिसे बाद में सेना ने बढ़ाकर 16 कर दिया।

मकसद: इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को खत्म करना है जिससे वह अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल की सप्लाई को रोक सकता है।

तकनीक: ट्रंप ने बताया कि इन जहाजों को खत्म करने के लिए उसी मिसाइल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो ड्रग तस्करों के जहाजों को उड़ाने के लिए की जाती है।

ट्रंप की ईरान को सीधी चेतावनी

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर ईरान को अल्टीमेटम दिया है:

"अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई माइंस बिछाई हैं, तो उन्हें तुरंत (IMMEDIATELY) हटा लिया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है, तो सैन्य अंजाम उस स्तर के होंगे जो पहले कभी नहीं देखे गए।"

उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान खुद इन माइंस को हटा लेता है, तो यह तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।

तेल की लाइफलाइन: दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

आर्थिक प्रभाव: यदि यह रास्ता बंद होता है, तो वैश्विक तेल की कीमतें रॉकेट की तरह बढ़ सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का संकट पैदा हो जाएगा।

भारत पर असर: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है। यही वजह है कि अमेरिका ने फिलहाल भारत को रूस से तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दी है ताकि ऊर्जा संकट को टाला जा सके।

युद्ध का 11वां दिन: बढ़ता तनाव

28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह युद्ध अब अपने 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि अभी और भी भीषण हमले होने बाकी हैं। दूसरी ओर, ईरान ने भी पलटवार की धमकी देते हुए कहा है कि वह अपने दुश्मन के लिए एक भी लीटर तेल नहीं छोड़ेंगे।