सफर में सुरक्षा का नया मंत्र, हाईवे पर आवारा जानवरों को हटाने के लिए यूपी सरकार का महाअभियान

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News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की सड़कों, खासकर नए एक्सप्रेसवे और चौड़े हाईवे पर सफर करना अब काफी सुखद हो गया है। घंटों का रास्ता मिनटों में तय हो रहा है, लेकिन इस रफ्तार के बीच एक ऐसा डर हमेशा बना रहता है जो किसी भी हंसते-खेलते परिवार के लिए 'काल' बन जाता है। वह डर है  अचानक सड़क के बीच में आ जाने वाले आवारा जानवर।

अंधेरे में तेज रफ्तार कार के सामने जब अचानक कोई गाय या नीलगाय आ जाती है, तो ड्राइवर को संभलने का मौका भी नहीं मिलता। आए दिन होने वाले इन खतरनाक हादसों ने कई घरों को उजाड़ दिया है। लेकिन अब यूपी सरकार ने इस समस्या की जड़ पर वार करने का मन बना लिया है। एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे को पूरी तरह 'आवारा पशु मुक्त' बनाने के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ा जा रहा है।

हादसों पर लगाम लगाने की कवायद
इस अभियान का सीधा सा मकसद यह है कि रफ्तार के दीवाने यात्रियों को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित न होना पड़े। यूपीडा (UPEIDA) और एनएचएआई (NHAI) जैसे विभाग अब आपसी तालमेल से काम कर रहे हैं। विशेष टीमों का गठन किया गया है, जिनका काम हाईवे पर घूमने वाले मवेशियों और नीलगायों को सुरक्षित तरीके से हटाकर उन्हें पास की 'गौशालाओं' या संरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाना है।

ड्रोन और पेट्रोलिंग टीमों का होगा पहरा
हकीकत ये है कि आवारा जानवर कई बार हाईवे की बाड़ (fencing) टूटने की वजह से सड़क पर आ जाते हैं। इस अभियान में सिर्फ जानवरों को हटाना ही शामिल नहीं है, बल्कि उस रास्ते को भी ब्लॉक करना है जहाँ से ये आते हैं। कई इलाकों में तो अब पेट्रोलिंग गाड़ियों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है और सीसीटीवी की मदद से उन हॉटस्पॉट्स (Hotspots) की पहचान की जा रही है जहाँ जानवर सबसे ज्यादा नज़र आते हैं।

एक संवेदनशील कदम
यह सिर्फ इंसानों की जान बचाने का सवाल नहीं है, बल्कि बेजुबान जानवरों के लिए भी यह जीवनदान है। तेज रफ्तार गाड़ियों की चपेट में आकर हर दिन हज़ारों मवेशी भी अपनी जान गंवाते हैं। सरकार का यह कदम इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा के लिहाज से एक संतुलित कोशिश मानी जा रही है।

आम लोगों का भी है साथ ज़रूरी
इस अभियान की सफलता में स्थानीय लोगों और हाईवे के आसपास के ग्रामीणों का साथ भी बहुत ज़रूरी है। अक्सर देखा गया है कि लोग अपने दुधारू पशुओं को दूध निकालने के बाद सड़क पर चरने के लिए छोड़ देते हैं। प्रशासन अब इसे लेकर सख्ती दिखा सकता है।

अगर यह अभियान सही मायने में सफल होता है, तो रात के अंधेरे में एक्सप्रेसवे पर गाड़ी चलाना उतना ही सुरक्षित होगा जितना दिन की रोशनी में। फिलहाल, इस पहल ने उन मुसाफिरों को बड़ी राहत दी है जिनका सारा दिन सड़कों और लंबी दूरी तय करने में गुजरता है।