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March 18 2026 03:38 pm

NEET Student Case : 20 दिनों से मूकदर्शक क्यों है CBI? पटना कोर्ट ने जांच एजेंसी को लगाई फटकार मनीष रंजन की जेल पर पूछे कड़े सवाल

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News India Live, Digital Desk : राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब न्यायपालिका ने जांच की कछुआ चाल पर नाराजगी जताई है। विशेष अदालत में हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, जहाँ सीबीआई के ढीले रवैये को लेकर कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की।

अदालत के तीखे सवाल: सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश ने सीबीआई के अधिकारियों से पूछा कि केस हाथ में लेने के पिछले 20 दिनों में एजेंसी ने क्या ठोस कार्रवाई की है? कोर्ट ने कहा, "20 दिनों से सीबीआई मूकदर्शक क्यों बनी हुई है? क्या एजेंसी को यह भी पता नहीं था कि आरोपी मनीष रंजन पहले से न्यायिक हिरासत में है?" मुआवजे और मानवाधिकार पर जोर: अदालत ने व्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि यदि किसी व्यक्ति को बिना किसी पुख्ता सबूत या जांच की सुस्ती के कारण जेल में रखा जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? कोर्ट ने सीधे तौर पर सवाल किया, "अगर कोई निर्दोष जेल की सलाखों के पीछे रह जाता है, तो उसे मुआवजा कौन देगा?"

POCSO एक्ट और जांच का पेंच: इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कोर्ट ने यह गौर किया कि छात्रा के नाबालिग होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा के संकेत मिलने के बावजूद शुरुआत में पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया था। हालांकि, अब बिहार सरकार की अधिसूचना के बाद सीबीआई ने इस मामले में पॉक्सो की धाराएं जोड़ दी हैं। सीबीआई ने कोर्ट को लिखित में बताया है कि फिलहाल उन्हें मनीष रंजन की कस्टडी की जरूरत नहीं है, जिस पर कोर्ट ने उनकी जेल की अनिवार्यता पर फिर सवाल उठाए।

क्या है पूरा मामला? जनवरी 2026 में पटना के एक हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा संदिग्ध परिस्थितियों में बेहोश मिली थी, जिसकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने हॉस्टल मालिक पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद पुलिस ने मनीष रंजन को गिरफ्तार किया था। अब इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच सीबीआई के पास है।