राजस्थान में कुदरत का कहर कोटा में पारा 46 के पार, जयपुर में लू के थपेड़ों से हाल बेहाल, अस्पतालों में बेड रिजर्व
News India Live, Digital Desk: मरुधरा में सूरज की तपिश अब जानलेवा साबित होने लगी है। राजस्थान के अधिकांश जिलों में भीषण गर्मी और 'हीटवेव' (Heatwave) ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शिक्षा नगरी कोटा वर्तमान में प्रदेश का सबसे गर्म इलाका बना हुआ है, जहाँ तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँच गया है। राजधानी जयपुर समेत अन्य पर्यटक स्थलों पर सन्नाटा पसरा है और सड़कों पर मानों कर्फ्यू जैसे हालात हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर अस्पतालों में विशेष बेड रिजर्व कर दिए हैं।
कोटा बना 'भट्टी', जयपुर में लू का रेड अलर्ट
राजस्थान के मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कोटा का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज किया गया है। गर्म हवाओं और सीधी धूप ने लोगों का घर से निकलना मुहाल कर दिया है। जयपुर की बात करें तो यहाँ भी पारा 44-45 डिग्री के बीच झूल रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले 48 घंटों में लू का प्रकोप और बढ़ेगा, जिससे राहत मिलने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।
पर्यटकों ने मोड़ा मुंह, सड़कों पर पसरा सन्नाटा
भीषण गर्मी का सीधा असर राजस्थान के पर्यटन उद्योग पर पड़ा है। जयपुर के आमेर किला, जलमहल और हवामहल जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। विदेशी सैलानियों ने या तो अपनी बुकिंग रद्द कर दी है या वे होटलों के कमरों तक ही सीमित रह गए हैं। दोपहर के समय शहरों की मुख्य सड़कें खाली नजर आ रही हैं और लोग केवल अति-आवश्यक कार्यों के लिए ही बाहर निकल रहे हैं।
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या, प्रशासन अलर्ट
गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इसे देखते हुए सरकार ने सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को 'हाई अलर्ट' पर रखा है। जयपुर और कोटा के बड़े अस्पतालों में लू से प्रभावित मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाए गए हैं और बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि तेज धूप में बाहर न निकलें और तरल पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें।
मवेशियों और बेजुबानों पर भी संकट
तपती धूप का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी दिखाई दे रहा है। ग्रामीण इलाकों में जल स्रोत सूखने लगे हैं, जिससे मवेशियों के लिए पानी का संकट खड़ा हो गया है। कई जगहों से लू के कारण पक्षियों के गिरने की खबरें भी आ रही हैं। प्रशासन ने नगर निगमों को निर्देश दिए हैं कि शहर के मुख्य चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की उचित व्यवस्था की जाए।