ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन का प्रस्ताव: दवा कंपनियों को रखना होगा हर बैच का रिकॉर्ड

ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन का प्रस्ताव: दवा कंपनियों को रखना होगा हर बैच का रिकॉर्ड

देश में दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए केंद्र सरकार के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का नया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन (G.S.R. 955(E)) जारी कर यह प्रस्ताव रखा है कि अब फार्मास्यूटिकल कंपनियों को अपने प्रत्येक दवा बैच की रिलीज के लिए अधिकृत योग्य विशेषज्ञों (Qualified Personnel) की नियुक्ति अनिवार्य रूप से करनी होगी। नए नियमों के लागू होने के बाद किसी भी दवा के पूरे लॉट को बाजार में बिक्री या वितरण के लिए तब तक नहीं भेजा जा सकेगा, जब तक कि कंपनी द्वारा अधिकृत योग्य तकनीकी अधिकारी दवा के बैच रिलीज सर्टिफिकेट (Batch Release Certificate) पर अपनी मुहर और लिखित मंजूरी न दे दे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय दवा उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करना, नकली या घटिया दवाओं के निर्माण पर पूरी तरह से नकेल कसना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फार्मा ब्रांड की साख को बढ़ाना है।

ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन का नया ड्राफ्ट और बैच रिलीज सर्टिफिकेट अनिवार्य

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा पेश किए गए नए प्रस्ताव के तहत दवाओं के निर्माण और वितरण से जुड़ी प्रक्रियाओं की जवाबदेही को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है। औषधि और प्रसाधन सामग्री नियमावली (Drugs Rules, 1945) में किए जा रहे बदलावों के मुताबिक, अब हर निर्माता कंपनी को बैच रिलीज सर्टिफिकेट जारी करने के लिए एक निर्धारित प्रारूप का पालन करना होगा। बैच रिलीज की यह प्रक्रिया दवा निर्माण का सबसे नाजुक चरण मानी जाती है। इसके अंतर्गत दवा की निर्माण सामग्री, लैब टेस्टिंग रिपोर्ट, स्टैबिलिटी, पैकेजिंग और गुणवत्ता के सभी मानकों की गहन समीक्षा की जाएगी। यदि गुणवत्ता का कोई भी एक पैरामीटर मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो अधिकृत अधिकारी को उस बैच की मंजूरी रोकने का कानूनी अधिकार होगा।

कौन होंगे अधिकृत अधिकारी और क्या होंगी अनिवार्य शैक्षणिक योग्यताएं

नए नियमों के मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दवा कंपनियों में बैच की जांच और मंजूरी देने वाला अधिकृत व्यक्ति कौन हो सकता है। केंद्र सरकार ने मनमाने चयन पर रोक लगाते हुए यह अनिवार्य किया है कि यह अधिकारी केवल वही व्यक्ति बन सकता है जिसके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से फार्मेसी (B.Pharm/M.Pharm), फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री या फिर क्लिनिकल फार्माकोलॉजी/माइक्रोबायोलॉजी में विशेषज्ञता वाली मेडिकल डिग्री हो। इसके साथ ही, उस व्यक्ति के पास दवा निर्माण और प्रयोगशाला जांच (Testing) का न्यूनतम वर्षों का व्यावहारिक अनुभव होना भी आवश्यक होगा। इससे कंपनियों के उच्च प्रबंधन की मनमानी खत्म होगी और पूरी तरह से सक्षम एवं उत्तरदायी वैज्ञानिक ही हर दवा की बाजार में आपूर्ति तय कर पाएंगे।

दवा कंपनियों के लिए व्यापक रिकॉर्ड-कीपिंग और डाटा विश्वसनीयता का दायरा

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अंतर्गत अब दवा निर्माता कंपनियों को अपने यहां निर्मित होने वाली प्रत्येक दवा के बैच मैनुफैक्चरिंग रिकॉर्ड (BMR) और टेस्टिंग रिकॉर्ड को डिजिटल और भौतिक रूप में लंबे समय तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। यदि भविष्य में किसी दवा के किसी बैच से किसी मरीज को साइड इफेक्ट होता है या गुणवत्ता पर कोई सवाल उठता है, तो जांच एजेंसियां तुरंत उस बैच का पूरा रिकॉर्ड खंगाल सकेंगी। रिकॉर्ड में यह स्पष्ट दर्ज होना चाहिए कि दवा के घटक (Ingredients) कहां से खरीदे गए, किस तापमान में दवा बनाई गई और किस टेक्निकल एक्सपर्ट ने इसे हरी झंडी दी। इस व्यवस्था से डेटा में हेरफेर या बैक-डेटेड एंट्रीज की गुंजाइश पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी, जिससे गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित होगा।

वैश्विक निर्यात बाजार में भारत की फार्मा साख होगी मजबूत

भारत को 'दुनिया की फार्मेसी' कहा जाता है और यहां से दुनिया के 200 से अधिक देशों को जेनेरिक दवाओं और टीकों का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है। हालांकि, हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गाहे-बगाहे सवाल उठते रहे हैं। इस नियामक संशोधन से अमेरिका के US-FDA और यूरोप के EMA (यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी) के कड़े नियमों की तर्ज पर भारत में भी 'क्वालिफाइड पर्सन' (QP) मॉडल लागू हो जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि इस सख्त व्यवस्था से न केवल भारत के घरेलू रोगियों को पूरी तरह से सुरक्षित और मानक दवाएं मिलेंगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजार में भी भारतीय फार्मास्यूटिकल सेक्टर की विश्वसनीयता को एक नया और मजबूत आधार मिलेगा।

सार्वजनिक सुझावों के बाद लागू होंगे अंतिम कड़े नियम

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन (Draft Amendment Rules) को गजट में प्रकाशित कर सभी प्रमुख फार्मा संगठनों, दवा निर्माताओं, विशेषज्ञों और आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा करने के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) इन नियमों को अंतिम रूप देकर पूरे देश में लागू कर देगा। आबकारी और ड्रग इंस्पेक्टरों को भी इन नियमों के आधार पर कंपनियों के औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) के विशेष अधिकार दिए जाएंगे।