उज्बेकिस्तान में MBBS करने वालों को भारत सरकार की सलाह

उज्बेकिस्तान में MBBS करने वालों को भारत सरकार की सलाह

विदेशों से डॉक्टरी की पढ़ाई (MBBS Abroad) करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA), ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास (Embassy of India in Tashkent) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सतर्क करने वाली विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। पिछले कुछ सालों में सेंट्रल एशिया के देश उज्बेकिस्तान में भारतीय छात्रों के बढ़ते रुझान और निजी कंसल्टेंट्स के भ्रामक विज्ञापनों के खेल को देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने छात्रों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि उज्बेकिस्तान के किसी भी मेडिकल कॉलेज या यूनिवर्सिटी में फीस जमा करने और एडमिशन लेने से पहले भारतीय दूतावास द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की गई विशेष 'कंट्री एडवाइजरी' (Embassy Student Advisory) को अनिवार्य रूप से पढ़ें और उसकी हर शर्त को अच्छी तरह समझ लें। ऐसा न करने पर छात्रों को भविष्य में भारत लौटने के बाद प्रैक्टिस करने के लिए मेडिकल रजिस्ट्रेशन (Medical License) पाने में गंभीर अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है।

#1. ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास की एडवाइजरी पढ़ना क्यों है अनिवार्य

ताशकंद में मौजूद भारतीय दूतावास समय-समय पर उज्बेकिस्तान के चिकित्सा शिक्षा परिदृश्य की जमीनी जांच-पड़ताल करके अपनी एडवाइजरी को अपडेट करता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, कई छात्र निजी एडमिशन एजेंटों और कंसल्टेंट्स के मीठे और आकर्षक दावों के जाल में फंसकर बिना सोचे-समझे ऐसे कॉलेजों में दाखिला ले लेते हैं जो भारत सरकार और एनएमसी (NMC) के नियमों पर खरे नहीं उतरते। दूतावास की एडवाइजरी में उज्बेकिस्तान के मान्यता प्राप्त मेडिकल संस्थानों की सूची, वहां पढ़ाई का माध्यम, क्लीनिकल ट्रेनिंग की व्यवस्था और हॉस्टल तथा सुरक्षा मानकों का पूरा आधिकारिक ब्योरा दिया गया है। भारत सरकार का साफ कहना है कि किसी भी एजेंट के मौखिक आश्वासन पर भरोसा करने के बजाय छात्र केवल दूतावास द्वारा सत्यापित जानकारी और दिशा-निर्देशों को ही एडमिशन का मुख्य आधार बनाएं।

#1. FMGL नियम 2021 और NMC के कड़े दिशा-निर्देशों का अनुपालन जरूरी

उज्बेकिस्तान में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने की सोच रहे प्रत्येक छात्र के लिए एनएमसी के विदेशी चिकित्सा स्नातक लाइसेंसधारी नियम (FMGL Regulations 2021) को पूरा करना कानूनन अनिवार्य है। सरकार की एडवाइजरी में यह साफ चेतावनी दी गई है कि यदि कोई उज्बेक यूनिवर्सिटी इन नियमों का 100% अनुपालन नहीं करती है, तो वहां से प्राप्त डिग्री भारत में पूरी तरह अमान्य (Invalid) घोषित कर दी जाएगी। नियमों के तहत पढ़ाई की कुल अवधि कम से कम 54 महीने (4.5 वर्ष) होनी चाहिए और उसी संस्थान में 12 महीने की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होनी चाहिए। इसके अलावा, पूरा कोर्स पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम (English Medium of Instruction) में होना आवश्यक है और छात्र को उसी देश में डॉक्टरों के रूप में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस प्राप्त होना चाहिए।

#1. ओवर-एडमिशन और क्लीनिकल ट्रेनिंग में भाषा की बाधा पर बड़ी चिंता

विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने उज्बेकिस्तान के कुछ मेडिकल संस्थानों में उजागर हुई कमियों और प्रशासनिक गड़बड़ियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सरकार द्वारा जारी अलर्ट नोट में यह पाया गया था कि कुछ उज्बेक मेडिकल यूनिवर्सिटीज अपनी वास्तविक क्षमता (Intake Capacity) से कहीं अधिक भारतीय छात्रों को दाखिला दे रही हैं, जिससे क्लासरूम और हॉस्पिटलों में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही, स्थानीय अस्पतालों में क्लीनिकल ट्रेनिंग (Hands-on Clinical Practice) के दौरान छात्रों को स्थानीय भाषा (उज्बेक/रूसी) के कारण मरीजों से बातचीत करने में बड़ी रुकावट आ रही है और अंग्रेजी माध्यम की प्रतिबद्धता कागजों तक सीमित रह जाती है। एडवाइजरी में आगाह किया गया है कि पर्याप्त प्रैक्टिकल ट्रेनिंग न मिलने की स्थिति में छात्र भारत में आयोजित होने वाली एफएमजीई/नेक्स्ट (NEXT) परीक्षा को पास करने में असमर्थ रहेंगे।

#1. फर्जी कंसल्टेंट्स और अनधिकृत ऑफ-शोर परिसरों से दूर रहने की हिदायत

सरकार ने अपनी एडवाइजरी में छात्रों और उनके अभिभावकों को अनधिकृत ऑफ-शोर परिसरों (Off-shore Campuses) और गैर-मान्यता प्राप्त प्राइवेट संस्थानों से सतर्क रहने को कहा है। एडवाइजरी के मुताबिक, एडमिशन दिलाने वाले कई एजेंट ऊंची कमीशन के चक्कर में छात्रों को गुमराह करके ऐसे कॉलेजों की ब्रांचों या निजी संस्थानों में भेज देते हैं जो एनएमसी और स्थानीय उज्बेक स्वास्थ्य मंत्रालय से अधिकृत नहीं होते। भारत सरकार ने निर्देश दिए हैं कि एडमिशन प्रक्रिया के दौरान किसी भी मध्यस्थ को एकमुश्त बड़ी रकम न दें और यूनिवर्सिटी की मान्यता का प्रमाण पत्र (Recognition Certificate) तथा नीट (NEET) क्वालीफाइंग स्कोरकार्ड की पात्रता स्वयं जांचें।

#1. उज्बेकिस्तान में मेडिकल एडमिशन के लिए छात्रों के लिए चेकलिस्ट

भारत सरकार और दूतावास ने उज्बेकिस्तान में एमबीबीएस करने की योजना बना रहे अभ्यर्थियों के लिए एक जरूरी सेफ्टी चेकलिस्ट जारी की है:

  1. नीट (NEET) परीक्षा क्वालीफाई करें: बिना नीट पास किए विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्र भारत में प्रैक्टिस करने के पात्र नहीं होंगे।

  2. दूतावास की वेबसाइट देखें: एडमिशन से पहले भारतीय दूतावास, ताशकंद (eoitashkent.gov.in) की आधिकारिक वेबसाइट पर लिस्टेड मान्य कॉलेजों की सूची अवश्य जांचें।

  3. इंग्लिश मीडियम का लिखित प्रमाण लें: कॉलेज से लिखित रूप में पुष्टि लें कि पूरा पाठ्यक्रम और क्लीनिकल रोटेशन केवल अंग्रेजी में पढ़ाया जाएगा।

  4. समान यूनिवर्सिटी में इंटर्नशिप: यह सुनिश्चित करें कि पढ़ाई के बाद 1 साल की इंटर्नशिप उसी यूनिवर्सिटी के संबद्ध अस्पताल में पूरी कराई जाएगी।

  5. एजेंटों से दूर रहें: किसी भी तीसरे पक्ष या कंसल्टेंट के निजी खातों में भारी-भरकम फीस जमा न करें और सीधे यूनिवर्सिटी के आधिकारिक चैनल से संपर्क करें।