विजयादशमी 2026: राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने दी बधाई, गोरखपुर में सीएम योगी की भव्य विजय शोभायात्रा आज
अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की शाश्वत विजय का पावन पर्व विजयादशमी पूरे देश में असीम उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस मंगल अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी कहे जाने वाले गोरखपुर में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में निकलने वाली पारंपरिक एवं भव्य विजय शोभायात्रा को लेकर जनसैलाब उमड़ पड़ा है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच गोरखपुर से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक विजय पर्व की अनूठी छटा देखने को मिल रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि विजयादशमी का त्योहार हमें मर्यादा, सत्य, साहस और न्याय के मार्ग पर चलने की निरंतर प्रेरणा देता है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि हम सभी अपने अंतस में छिपी बुराइयों, नकारात्मक विचारों और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त कर एक सशक्त, समरस और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया मंच और अपने संदेश के माध्यम से देशवासियों को विजयदशमी की बधाई देते हुए कहा कि यह पावन अवसर समाज में अन्याय के खिलाफ खड़े होने और राष्ट्र निर्माण के लिए एकजुट होकर काम करने का भाव जागृत करता है।
राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने दिया सत्य और संकल्प का संदेश
राष्ट्रपति भवन से जारी संदेश में राष्ट्रपति ने विशेष रूप से महिलाओं के सम्मान, समाज के वंचित वर्गों के कल्याण और सत्यनिष्ठा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर सत्य की स्थापना की और मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया, ठीक उसी प्रकार समाज के हर नागरिक को सामाजिक समरसता और प्रगति के लिए अपना योगदान देना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की शाश्वत विजय का जीवंत प्रतीक है। आज भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और विजय की नई इबारत लिख रहा है। ऐसे में यह पर्व हर नागरिक को नकारात्मकता को परास्त कर राष्ट्र के विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ने का नया संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है। केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों ने भी इस अवसर पर देश की जनता को हार्दिक बधाई दी।
गोरखपुर में गोरक्षपीठाधीश्वर सीएम योगी की ऐतिहासिक विजय शोभायात्रा
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ में विजयादशमी का उत्सव अपनी अलौकिक परंपरा के लिए देश भर में प्रसिद्ध है। नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार, गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुबह मंदिर परिसर में विधि-विधान से विशेष अनुष्ठान संपन्न किए। इसमें गुरु गोरखनाथ जी का पूजन, गोसेवा और विशेष शस्त्र पूजन शामिल रहा। नाथ परंपरा में शस्त्र और शास्त्र दोनों के समन्वय को धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अनिवार्य माना गया है।
दोपहर बाद गोरक्षपीठ से भव्य विजय शोभायात्रा आरंभ होगी। इस पारंपरिक शोभायात्रा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पारंपरिक वेशभूषा और गुरु गोरखनाथ के प्रतिनिधि के रूप में विशेष रथ पर सवार होंगे। शोभायात्रा में नाथ संप्रदाय के साधु-संत, बटुक, लोक कलाकार और हजारों की संख्या में श्रद्धालु भजन-कीर्तन और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर शामिल हो रहे हैं। यह शोभायात्रा गोरक्षनाथ मंदिर से निकलकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मानसरोवर रामलीला मैदान पहुंचेगी।
मानसरोवर मैदान में भगवान श्रीराम का तिलक और भव्य रावण दहन
गोरखपुर की इस ऐतिहासिक शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण मानसरोवर रामलीला मैदान में होने वाला मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का राजतिलक है। यहां गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और भक्त हनुमान का विधि-विधान से पूजन और तिलक कर उनकी आरती उतारेंगे। इसके बाद मैदान में विशालकाय रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा।
गोरखपुर की परंपरा की एक अत्यंत अनूठी मिसाल यह भी है कि इस यात्रा में सामाजिक समरसता का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। जब यह शोभायात्रा मुस्लिम बहुल इलाकों और बुनकर बस्तियों से होकर गुजरती है, तो स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी गोरक्षपीठाधीश्वर का भव्य स्वागत करते हैं और फूल बरसाते हैं। यह दृश्य सदियों से चली आ रही आपसी भाईचारे और सौहार्द की नींव को और मजबूत करता है।
विजयादशमी पर शुभ विजय मुहूर्त और पूजन का विशेष महत्व
ज्योतिषीय गणना के अनुसार विजयादशमी का दिन स्वयं में एक अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत, नए व्यापार का आरंभ, गृह प्रवेश या वाहन की खरीदारी अत्यंत फलदायी और शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर मां भगवती दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं को भयमुक्त किया था और भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का संहार कर धर्म की ध्वजा फहराई थी।
इस दिन शस्त्र पूजन (आयुध पूजा) के साथ-साथ शमी वृक्ष की पूजा का भी विशेष विधान है। पौराणिक मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे और विजयदशमी के दिन उनकी पुनः पूजा कर कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। यही कारण है कि आज के दिन सुरक्षा बल, पुलिस बल, क्षत्रिय समाज और सनातन परंपरा के अनुयायी अपने अस्त्रों और उपकरणों की पूजा कर विजय की कामना करते हैं।
आधुनिक परिप्रेक्ष्य में विजयादशमी और आत्ममंथन की जरूरत
आज के दौर में विजयादशमी केवल एक पौराणिक कथा का स्मरण नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के लिए अपने भीतर झांकने का दिन है। समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, नफरत, भेदभाव, ईर्ष्या और अकर्मण्यता जैसे आंतरिक रावणों का दहन करना ही इस पर्व की वास्तविक सार्थकता है। तकनीक और कृत्रिम मेधा (AI) के इस युग में नैतिक मूल्यों की रक्षा और सत्य के प्रति अडिग रहना ही सबसे बड़ी विजय है।
पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित सभी प्रमुख राज्यों में रामलीला मैदानों और विसर्जन स्थलों पर ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से निगरानी रखी जा रही है। जगह-जगह आयोजित हो रहे सांस्कृतिक उत्सव और रामलीला मंचन भारतीय संस्कृति की अमर गाथा को नई पीढ़ी तक सहजता से पहुंचा रहे हैं। विजयादशमी का यह महापर्व हम सभी को धर्म, सत्य, कर्तव्यनिष्ठा और मानवता के मार्ग पर बिना डिगे चलने का शाश्वत संदेश देता है।