नहाने के तौलिए को कितने दिन में धोना चाहिए? गीला छोड़ने की यह आम आदत बन सकती है गंभीर बीमारियों की वजह, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

नहाने के तौलिए को कितने दिन में धोना चाहिए? गीला छोड़ने की यह आम आदत बन सकती है गंभीर बीमारियों की वजह, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

दैनिक जीवन की भागदौड़ में हम अपने कपड़ों की स्वच्छता, चेहरे की देखभाल और खान-पान पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन अक्सर उस एक जरूरी चीज को नजरअंदाज कर बैठते हैं जो नहाने के तुरंत बाद हमारी त्वचा के सीधे संपर्क में आती है—हमारा नहाने का तौलिया (Bath Towel)। अधिकांश घरों में यह आम चलन है कि नहाने के बाद तौलिए को बाथरूम की खूंटी पर ही यूं ही टांग दिया जाता है या बिस्तर पर गीला छोड़ दिया जाता है, और उसे हफ्तों तक धोने की जहमत नहीं उठाई जाती। अगर आपकी भी यही आदत है, तो यह लापरवाही आपकी त्वचा, बालों और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स के अनुसार, एक नमी से भरा और गंदा तौलिया बैक्टीरिया, फंगस और कीटाणुओं का सबसे मुफीद ब्रीडिंग ग्राउंड (प्रजनन स्थल) बन जाता है।

जब हम नहाकर निकलते हैं, तो हमारा शरीर पूरी तरह रोगाणुमुक्त नहीं होता। पानी और साबुन से मैल तो धुल जाता है, लेकिन त्वचा की सबसे ऊपरी परत से लाखों मृत त्वचा कोशिकाएं (Dead Skin Cells), प्राकृतिक तेल (Sebum) और शरीर पर मौजूद सामान्य बैक्टीरिया तौलिए के रेशों में चिपक जाते हैं। इसके साथ ही जब तौलिया शरीर की नमी सोखता है, तो वह पूरी तरह भीग जाता है। यदि इस भीगे हुए तौलिए को बंद और नम बाथरूम में छोड़ दिया जाए, तो नमी, अंधेरा और गर्मी मिलकर कीटाणुओं के तेजी से पनपने के लिए एक आदर्श वातावरण तैयार कर देते हैं।

नहाने के तौलिए को कितने दिनों में धोना चाहिए?

अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों (जैसे CDC और अमेरिकन क्लीनिंग इंस्टीट्यूट) के साथ-साथ डर्मेटोलॉजिस्ट्स की सलाह के मुताबिक, नहाने के तौलिए को अधिकतम 3 से 4 बार इस्तेमाल करने के बाद अवश्य धो लेना चाहिए। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि आप दिन में एक बार नहाते हैं, तो हर 3 दिन में तौलिए को गर्म पानी और डिटर्जेंट से धोना अनिवार्य है।

हालांकि, यह 3 दिन का नियम केवल तब लागू होता है जब हर इस्तेमाल के बाद आप तौलिए को पूरी तरह फैलाकर धूप या अच्छी हवादार जगह में सुखाते हों। यदि आपका तौलिया पूरी तरह सूख नहीं पाता और उसमें से हल्की सी भी सीलन या खट्टी बदबू (Musty Smell) आने लगती है, तो उसे 3 दिन का इंतजार किए बिना तुरंत धोने के लिए डाल देना चाहिए। बदबू इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि तौलिए के रेशों में बैक्टीरिया और मोल्ड (फंगस) की कॉलोनियां बन चुकी हैं।

किन स्थितियों में हर इस्तेमाल के बाद धोना जरूरी है?

कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में तौलिए को 3 दिन तक चलाने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए और उसे एक ही इस्तेमाल के बाद धोना पड़ता है:

  1. जिम या वर्कआउट के बाद: पसीना पोंछने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जिम टॉवल को हर सेशन के बाद धोना जरूरी है, क्योंकि पसीने में बैक्टीरिया बहुत तेजी से मल्टीप्लाई होते हैं।

  2. बीमारी या स्किन इन्फेक्शन होने पर: यदि परिवार में कोई सदस्य सर्दी-जुकाम, फ्लू, दाद, खाज, खुजली (Scabies) या किसी अन्य संक्रामक त्वचा रोग से पीड़ित है, तो उनके तौलिए को एक बार इस्तेमाल के बाद तुरंत गर्म पानी में कीटाणुरहित करना चाहिए।

  3. गंभीर मुंहासे (Acne) या एक्जिमा: यदि आपकी चेहरे या पीठ की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है और ब्रेकआउट्स की समस्या रहती है, तो चेहरे के लिए इस्तेमाल होने वाले तौलिए को रोजाना बदलना सबसे सुरक्षित रहता है।

गीला तौलिया छोड़ने से सेहत को होने वाले बड़े नुकसान

गीले तौलिए को बाथरूम के भीतर या बंद कमरे में टांगने की आदत कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है:

  • फंगल और यीस्ट इन्फेक्शन: गीले तौलिए में 'कैंडिडा' और अन्य फंगस तेजी से पनपते हैं। जब आप उसी तौलिए से अपनी जांघों, अंडरआर्म्स या प्राइवेट पार्ट्स को सुखाते हैं, तो 'जॉक इच' (Jock Itch), रिंगवर्म (दाद) और एथलीट फुट जैसे जिद्दी फंगल संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

  • मुंहासे और स्किन एलर्जी: गंदे तौलिए में मौजूद मृत कोशिकाएं और 'स्टैफिलोकोकस' (Staphylococcus) जैसे बैक्टीरिया तौलिए के जरिए दोबारा आपके चेहरे के खुले पोर्स में चले जाते हैं। इससे चेहरे पर गंभीर पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और त्वचा में जलन की समस्या होने लगती है।

  • अप्रिय दुर्गंध और सांस की तकलीफ: सीलन भरे तौलिए में मोल्ड और फफूंद जमने लगती है। जो लोग पहले से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या धूल/सीलन से एलर्जी से पीड़ित हैं, उनके लिए ऐसे तौलिए के संपर्क में आना छींक, खांसी और सांस संबंधी दिक्कतों को ट्रिगर कर सकता है।

तौलिए को धोने और सुखाने का सही वैज्ञानिक तरीका

तौलिए को केवल पानी में खंगाल लेना पर्याप्त नहीं है; उसे सही तरीके से सैनिटाइज करना जरूरी है:

  1. गर्म पानी का इस्तेमाल: जब भी संभव हो, तौलिए को 60 डिग्री सेल्सियस या गुनगुने पानी में अच्छे एंटी-बैक्टीरियल डिटर्जेंट के साथ धोएं। गर्म पानी रेशों के भीतर छिपे बैक्टीरिया और तेल को पूरी तरह नष्ट कर देता है।

  2. धूप में सुखाना सबसे बेहतरीन: धोने के बाद तौलिए को तेज धूप में फैलाकर सुखाएं। सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणें एक प्राकृतिक कीटाणुनाशक की तरह काम करती हैं और सीलन की बदबू को जड़ से खत्म करती हैं।

  3. फैब्रिक सॉफ्टनर का सीमित इस्तेमाल: बहुत अधिक फैब्रिक सॉफ्टनर का इस्तेमाल करने से तौलिए के रेशों पर एक मोम जैसी परत चढ़ जाती है, जिससे तौलिए की पानी सोखने की क्षमता कम हो जाती है। इसके स्थान पर कभी-कभी एक कप सफेद सिरका (White Vinegar) रिंस साइकिल में डालने से तौलिया मुलायम भी रहता है और बदबू भी दूर होती है।

तौलिया इस्तेमाल करते समय इन नियमों का जरूर करें पालन

हाइजीन को बनाए रखने के लिए कुछ बुनियादी नियमों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बेहद आवश्यक है। सबसे पहला और महत्वपूर्ण नियम यह है कि अपना तौलिया कभी किसी के साथ साझा न करें; परिवार के सदस्यों में भी हर व्यक्ति का अपना अलग तौलिया होना चाहिए। दूसरा, नहाने के बाद तौलिए को कभी भी मरोड़कर या मोड़कर न रखें; इसे खुली हवा में सीधे तार पर पूरी चौड़ाई के साथ फैलाएं। तीसरा, एक ही तौलिए को 1 से 2 साल से अधिक इस्तेमाल न करें, क्योंकि बार-बार धोने से उसके रेशे घिस जाते हैं और उनकी अवशोषण क्षमता समाप्त हो जाती है। छोटी सी लगने वाली यह सावधानी आपको त्वचा के अनेक गंभीर संक्रमणों से सुरक्षित रख सकती है।