PM Modi Chintan Shivir: 23-24 सितंबर को पीएम मोदी की अध्यक्षता में चिंतन शिविर, विकसित भारत 2047 के रोडमैप पर महामंथन शुरू

PM Modi Chintan Shivir: 23-24 सितंबर को पीएम मोदी की अध्यक्षता में चिंतन शिविर, विकसित भारत 2047 के रोडमैप पर महामंथन शुरू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 23 और 24 सितंबर को एक विशेष और व्यापक चिंतन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं, प्रशासनिक सुधारों और दीर्घावधि राष्ट्रीय लक्ष्यों को गति देने के उद्देश्य से आयोजित इस दो दिवसीय सत्र में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सभी कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी एक मंच पर जुट रहे हैं। इस चिंतन शिविर का मुख्य केंद्र बिंदु वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार करना है।

आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत को आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी और वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के लिए सरकार नीतिगत फैसलों के त्वरित क्रियान्वयन पर जोर दे रही है। यह बैठक केवल पारंपरिक समीक्षा बैठक नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय (Inter-Ministerial Convergence), प्रक्रियाओं को सरल बनाने और जन-केंद्रित शासन को और अधिक प्रभावी बनाने पर गंभीर मंथन किया जाएगा।

Agenda and Strategic Goals: विकसित भारत के 5 प्रमुख स्तंभों पर होगा विचार-मंथन

चिंतन शिविर के दौरान सरकार के दीर्घकालिक एजेंडे को ठोस रूप देने के लिए कई विशिष्ट तकनीकी और रणनीतिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। विचार-विमर्श के केंद्र में मुख्य रूप से 5 रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं:

  1. आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन: भारत को विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से स्थापित करने, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा देने, एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त करने और युवाओं के लिए भविष्य के अनुकूल नए रोजगार अवसर तैयार करने पर विशेष सत्र होंगे।

  2. आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स: पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे आधुनिकीकरण और बंदरगाहों के विस्तार से लॉजिस्टिक्स लागत घटाने के उपायों पर चर्चा होगी।

  3. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई (AI): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर मिशन, साइबर सुरक्षा और ई-गवर्नेंस के जरिए सरकारी सेवाओं को पारदर्शी और अंतिम व्यक्ति तक सुलभ बनाने की कार्ययोजना।

  4. सतत विकास और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन: नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों की दिशा में सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, जैव ईंधन और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली (Mission LiFE) का विस्तार।

  5. सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास: स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और महिला नेतृत्व वाले विकास (Women-Led Development) को जमीनी स्तर तक पहुंचाना।

Governance Reforms: प्रशासनिक दक्षता, डिरिगुलेशन और ईज ऑफ लिविंग पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासनिक मॉडल का हमेशा से यह सिद्धांत रहा है कि नीतियां फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका सीधा प्रभाव नागरिकों के दैनिक जीवन पर दिखे। शिविर में नौकरशाही की कार्यशैली को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए प्रशासनिक सुधारों पर गहन विमर्श होगा।

बैठक में 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) को बढ़ाने के लिए पुराने कानूनों को निरस्त करने, अनुपालन बोझ (Compliance Burden) को न्यूनतम करने और डिजिटल निगरानी प्रणालियों को अपनाने पर नए लक्ष्य तय किए जाएंगे। इसके अलावा सचिवों के अधिकार प्राप्त समूहों (Empowered Groups of Secretaries) द्वारा तैयार किए गए प्रजेंटेशन पर भी कैबिनेट स्तर पर फीडबैक लिया जाएगा।

Inter-Ministerial Coordination: साइलो कल्चर खत्म कर टीम इंडिया अप्रोच

इस चिंतन शिविर का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू मंत्रालयों के बीच दीवारों को तोड़कर एक एकीकृत 'टीम इंडिया' भावना के साथ काम करना है। अक्सर यह देखा जाता है कि कई बड़ी ढांचागत परियोजनाएं अंतर-मंत्रालयी मंजूरियों की देरी से अटक जाती हैं।

इस सत्र में मंत्रियों और विभिन्न विभागों के सचिवों को एक साथ बैठाकर समस्याओं के त्वरित समाधान (Problem Solving) की साझा रणनीति बनाई जाएगी। प्रधानमंत्री द्वारा सभी मंत्रालयों को 100-दिवसीय प्राथमिकताओं और अगले 5 वर्षों के ठोस आउटकम-बेस्ड लक्ष्यों (Outcome-based targets) पर निरंतर प्रगति की समीक्षा का निर्देश दिया जाएगा।

Roadmap Towards 2047: भविष्य की वैश्विक महाशक्ति के रूप में भारत का उदय

वर्ष 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़े हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीवन की गुणवत्ता, प्रति व्यक्ति आय में भारी वृद्धि, उन्नत शिक्षा व्यवस्था और वैश्विक कूटनीति में भारत की मजबूत स्थिति को सुनिश्चित करना शामिल है।

चिंतन शिविर में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chains) में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने, रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने और अंतरिक्ष व डीप-टेक इनोवेशन में वैश्विक नेतृत्व कायम करने के व्यावहारिक कदमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।