सावधान अमेरिका! UNGA में गरजने आ रहे हैं मसूद पेजेशकियान; ट्रंप की 'तबाही वाली धमकी' का मंच से देंगे जवाब?
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च-स्तरीय सत्र में दुनिया की दो सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी ताकतों—अमेरिका और ईरान—के बीच का टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संयुक्त राष्ट्र के ऐतिहासिक मंच से ईरान को सीधी और खुली सैन्य धमकियां दिए जाने के बाद अब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं।
वैश्विक कूटनीति के गलियारों में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि क्या मसूद पेजेशकियान संयुक्त राष्ट्र के पोडियम से डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक भाषा का करारा पलटवार करेंगे? मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, समुद्री मार्गों की नाकेबंदी और परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनातनी के बीच पेजेशकियान का यह संबोधन अंतरराष्ट्रीय राजनीति की भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
Trump's 'Deal or Annihilate' Ultimatum: ट्रंप ने दिया था तबाही का अल्टीमेटम
ईरानी राष्ट्रपति के संबोधन से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से अपने भाषण में बेहद सख्त और धमकी भरा रुख अपनाया था। ट्रंप ने विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि उनके सामने ईरान को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला लेने की घड़ी आ गई है:
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ट्रंप ने कहा, "या तो ईरान के साथ ऐसा समझौता (Deal) हो जो उसे फिर से संभलने का मौका दे, या फिर मैं इस्लामिक गणराज्य को पूरी तरह 'नेस्तनाबूद' (Annihilate) कर दूं और ऐसा तेजी से करूं ताकि उन्हें कभी दोबारा उठने का मौका न मिले।"
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उन्होंने दुनिया के देशों से ईरान का पूर्ण आर्थिक बहिष्कार करने और उसके नागरिक विमानों की लैंडिंग तक रोकने की अपील की।
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ट्रंप के भाषण के दौरान हॉल में मौजूद ईरानी राजनयिकों के दल ने कड़ा विरोध जताते हुए महज 10 मिनट के भीतर सदन से वॉकआउट कर दिया था।
ट्रंप के इस कड़े भाषण के बाद से ही वैश्विक मीडिया और कूटनीतिक विश्लेषकों की निगाहें ईरानी राष्ट्रपति के पलटवार पर जम गई हैं।
Pezeshkian's Agenda at UNGA: तेहरान से क्या संदेश लेकर आए हैं पेजेशकियान?
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान विदेश मंत्री अब्बास अराघची और शीर्ष राजनयिकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे से रवाना होने से ठीक पहले पेजेशकियान ने अपने इरादे साफ कर दिए थे।
पेजेशकियान ने कहा था, "ईरानी जनता सिर उठाकर जीती है। तमाम प्रतिबंधों, युद्ध और गैर-बराबरी के बावजूद हमारे लोगों ने अपनी जमीन पर डटकर मुकाबला किया है। हम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने देश के हितों और संप्रभुता का दृढ़ता से बचाव करेंगे और दुनिया के सामने पश्चिमी पाखंड का पर्दाफाश करेंगे।"
माना जा रहा है कि पेजेशकियान अपने भाषण में निम्नलिखित 4 प्रमुख मुद्दों पर तीखा हमला बोलेंगे:
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अमेरिकी आक्रामकता और धमकियों का विरोध: ट्रंप की 'तबाही' वाली भाषा को अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताते हुए वैश्विक समुदाय से अमेरिका की दादागीरी का संज्ञान लेने की मांग।
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गाजा और पश्चिम एशिया में मानवीय संकट: इजरायल के सैन्य अभियानों और पश्चिमी देशों द्वारा दी जा रही सैन्य सहायता को अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध करार देना।
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आर्थिक प्रतिबंधों को वित्तीय आतंकवाद बताना: अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आम नागरिकों पर पड़ने वाले असर और दवाओं-खाद्य पदार्थों की किल्लत को मानवाधिकार उल्लंघन के तौर पर पेश करना।
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परमाणु और रक्षा संप्रभुता: यह स्पष्ट करना कि ईरान किसी भी सैन्य हमले या दबाव के आगे नहीं झुकेगा और अपनी रक्षा तकनीक को विकसित करने का उसका संप्रभु अधिकार है।
Diplomatic Drama: क्या पर्दे के पीछे बातचीत की भी कोई गुंजाइश है?
संयुक्त राष्ट्र में एक तरफ जहां मंच से तीखी बयानबाजी और धमकियों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ बैकचैनल कूटनीति के संकेत भी मिल रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं खुलासा किया था कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने न्यूयॉर्क में ईरानी अधिकारियों के साथ लगभग तीन घंटे की लंबी बातचीत की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत ने भी संकेत दिए हैं कि यदि माहौल अनुकूल रहता है, तो वाशिंगटन कूटनीतिक समाधान और प्रत्यक्ष वार्ताओं के लिए हमेशा तैयार है। हालांकि, ईरान के भीतर सर्वोच्च नेता के अंतिम रुख और आंतरिक खींचतान के चलते यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मंच का टकराव द्विपक्षीय वार्ताओं का रास्ता खोलेगा या खाई को और गहरा कर देगा।
Global Implications: तेल बाजार और वैश्विक सुरक्षा पर सबकी निगाहें
ईरान और अमेरिका के बीच संयुक्त राष्ट्र में होने वाला यह वाकयुद्ध केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के शिपिंग रूट पर पड़ता है।
यदि पेजेशकियान अपने संबोधन में टकराव का रुख जारी रखते हैं और दोनों पक्षों में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं दिखती, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नया उछाल देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि आज जब पेजेशकियान संयुक्त राष्ट्र के मंच पर खड़े होंगे, तो दुनिया की नजरें उनके हर एक शब्द और बॉडी लैंग्वेज पर टिकी रहेंगी।