NIA की बड़ी कार्रवाई: अमेरिकी ऑपरेटिव मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, भारत-विरोधी साजिश का पर्दाफाश
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने देश की संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा के खिलाफ चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र का बेहद चौकाने वाला खुलासा किया है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA ने मंगलवार को दिल्ली की विशेष राउज एवेन्यू कोर्ट में एक बेहद संवेदनशील मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में कुल सात विदेशी नागरिकों को आरोपी बनाया गया है, जिसमें अमेरिका और यूक्रेन के नागरिक शामिल हैं। मुख्य आरोपी अमेरिकी नागरिक और भाड़े के सैनिक मैथ्यू एरन वैन डाइक के साथ-साथ छह यूक्रेनी नागरिकों पर म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से गहरे संबंध रखने और भारत-विरोधी ताकतों को अत्याधुनिक सैन्य व ड्रोन ट्रेनिंग मुहैया कराने की गंभीर साजिश रचने का पुख्ता आरोप लगाया गया है। इस सनसनीखेज कार्रवाई के बाद से अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच भारी हलचल मच गई है।
गैर-कानूनी गतिविधियां (UAPA) के बजाय इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
इस बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल मामले की जांच की शुरुआत में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण आतंकवाद-रोधी कड़े कानून यानी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत शुरुआती पड़ताल शुरू की गई थी। हालांकि, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी और सबूतों को इकट्ठा किया गया, तो विशेष जज प्रशांत शर्मा के समक्ष दाखिल की गई अंतिम चार्जशीट में NIA ने यूएपीए (UAPA) की धाराओं का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बजाय, एजेंसी ने इन विदेशी आरोपियों पर इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट की धारा 21 और 23 के तहत कानूनी शिकंजा कसा है। इन धाराओं के तहत भारत की सीमाओं में अवैध रूप से प्रवेश करने, देश के प्रतिबंधित और संवेदनशील क्षेत्रों में बिना अनुमति आवाजाही करने तथा वैध वीजा नियमों व कानूनों का खुलेआम उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचे आरोपी, ड्रोन की भारी खेप और उग्रवादियों को ट्रेनिंग
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) द्वारा कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों और खुलासों के अनुसार, यह पूरा अंतरराष्ट्रीय गिरोह इस साल मार्च के महीने में भारत आया था। इन सभी ने वैध पर्यटक या बिजनेस वीजा का इस्तेमाल किया, लेकिन इसके बाद वे मिजोरम जैसे संवेदनशील और संरक्षित पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहुंचे। वहां से ये विदेशी नागरिक अवैध रूप से भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार करके पड़ोसी देश म्यांमार की सीमा में दाखिल हुए। उल्लेखनीय है कि म्यांमार में साल 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद से ही वहां की मिलिट्री सरकार के खिलाफ कई विद्रोही और जातीय सशस्त्र समूह संघर्ष कर रहे हैं। आरोप है कि इसी समूह ने यूरोप से भारत के सुरक्षित रास्तों का इस्तेमाल करते हुए म्यांमार तक ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरणों की एक बड़ी खेप पहुंचाई थी और वहां के विद्रोही संगठनों को खतरनाक ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग दी थी। एजेंसी की जांच में यह भी सामने आया है कि इन म्यांमार के विद्रोही गुटों के तार भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय कुख्यात उग्रवादी संगठनों से भी जुड़े हुए हैं, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं।
म्यांमार में नागरिक विमान पर हुए सुसाइड ड्रोन हमले में भी शामिल था यह गिरोह
जांच एजेंसी ने अदालत को यह भी जानकारी दी है कि यह विदेशी नेटवर्क सिर्फ ट्रेनिंग देने तक ही सीमित नहीं था, बल्कि यह सीधे तौर पर म्यांमार में हुई हिंसक वारदातों में भी संलिप्त रहा है। यह समूह म्यांमार की धरती पर एक नागरिक विमान पर अंजाम दिए गए सुसाइड ड्रोन हमले में भी सीधे तौर पर शामिल पाया गया है। इस साल की शुरुआत में मांडले शहर जाने वाले एक आम यात्री विमान को निशाना बनाकर सुसाइड ड्रोन से हमला किया गया था, जिसने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। NIA अब म्यांमार में सक्रिय इस खतरनाक नेटवर्क के मुख्य आतंकी मास्टरमाइंड और अन्य स्लीपर सेल से इनके संबंधों की गहराई से कड़ियां जोड़ने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस साजिश के पीछे और कौन-कौन से अंतरराष्ट्रीय चेहरे बेनकाब होने बाकी हैं।
कौन है मुख्य आरोपी अमेरिकी ऑपरेटिव मैथ्यू एरन वैन डाइक और उसका आपराधिक इतिहास?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला नाम अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैन डाइक का है, जिसे अंतरराष्ट्रीय खुफिया हलकों में अमेरिकी 'डीप स्टेट' का एक अहम हिस्सा माना जाता है। मैथ्यू एरन वैन डाइक 'सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' (SOLI) नाम की एक संस्था का संस्थापक है, जो मुख्य रूप से एक नॉन-प्रॉफिट प्राइवेट सिक्योरिटी फर्म के रूप में काम करती है और दुनिया भर में तानाशाही सरकारों के खिलाफ हथियार उठाकर लड़ने वाले मिलिशिया समूहों व विद्रोही संगठनों को सामरिक और सैन्य ट्रेनिंग देने का काम करती है। वैन डाइक का इतिहास काफी विवादास्पद रहा है और वह इससे पहले लीबिया और सीरिया जैसे दुनिया के सबसे गंभीर और खूनी संघर्ष क्षेत्रों में भी सक्रिय रूप से शामिल रह चुका है। उसकी इस संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि ने इस मामले की गंभीरता को कई गुना बढ़ा दिया है।
मार्च में हुई थी गिरफ्तारी, दिल्ली कोर्ट में 1 अक्टूबर को होगी अगली महत्वपूर्ण सुनवाई
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने बेहद मुस्तैदी दिखाते हुए इसी साल मार्च के महीने में मुख्य आरोपी मैथ्यू वैन डाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से हिरासत में ले लिया था, जबकि उसके साथ शामिल अन्य यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से दबोचा गया था। इन सभी विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के करीब सात महीने की लंबी और गहन जांच-पड़ताल के बाद आखिरकार NIA ने यह विस्तृत चार्जशीट अदालत में पेश की है। दिल्ली की विशेष अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले का संज्ञान लेते हुए पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई के लिए आगामी 1 अक्टूबर की तारीख तय की है। यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा पार घुसपैठ और विदेशी ताकतों द्वारा पूर्वोत्तर भारत को अस्थिर करने की साजिशों को बेनकाब करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।