ट्रॉमा और मानसिक सदमे से बढ़ जाता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा, नई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

ट्रॉमा और मानसिक सदमे से बढ़ जाता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा, नई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

दैनिक जीवन की भागदौड़ और अप्रत्याशित परिस्थितियों में मनुष्य कभी-कभी ऐसी भीषण घटनाओं का सामना कर जाता है जो उसे मानसिक और शारीरिक रूप से अंदर तक झकझोर कर रख देती हैं। जीवन में घटने वाली ऐसी दर्दनाक और भयावह घटनाओं को सामान्य बोलचाल और चिकित्सीय भाषा में 'ट्रॉमा' या मानसिक सदमा कहा जाता है। हालांकि, अधिकांश लोग इसे केवल एक मानसिक या भावनात्मक समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हाल ही में सामने आए एक व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। एक नई और बेहद महत्वपूर्ण रिसर्च के अनुसार, किसी भी बड़े ट्रॉमा के बाद पैदा होने वाली मानसिक परेशानियां और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विकार भविष्य में इंसान के दिल की सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकते हैं। इन समस्याओं के कारण आगे चलकर हार्ट अटैक (दिल का दौरा), स्ट्रोक और अन्य गंभीर कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का जोखिम कई गुना तक बढ़ जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मानसिक सदमे और हृदय रोगों के बीच क्या संबंध है और यह हमारे शरीर को किस प्रकार प्रभावित करता है।

क्या है ट्रॉमा और इसमें किन दर्दनाक घटनाओं को किया जाता है शामिल

यह समझना बेहद आवश्यक है कि आखिर 'ट्रॉमा' या सदमा किसे कहा जाता है और इसमें किस तरह के अनुभव शामिल होते हैं। चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक शोध के अनुसार, ट्रॉमा उन गंभीर और अत्यधिक तनावपूर्ण घटनाओं को कहा जाता है जो व्यक्ति के सामान्य जीवन चक्र को अचानक और बुरी तरह से बाधित कर देती हैं। इसमें कई तरह की भयावह स्थितियां शामिल हो सकती हैं, जैसे अचानक कहीं भीषण आग लग जाना, कोई बड़ा धमाका होना, किसी प्रकार का गंभीर शारीरिक हमला या हिंसा का शिकार होना, किसी बेहद करीबी और प्रियजन की अचानक मौत या आत्महत्या, या फिर खुद किसी गंभीर और लाइलाज बीमारी या गहरी शारीरिक चोट की चपेट में आ जाना। ये सभी ऐसी घटनाएं हैं जो इंसान के अवचेतन मन और मस्तिष्क पर बहुत गहरा और नकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं। जब कोई व्यक्ति इस प्रकार के सदमे से गुजरता है, तो उसका मानसिक संतुलन चरमरा जाता है, जो सीधे तौर पर उसके शारीरिक स्वास्थ्य और विशेषकर हृदय प्रणाली को प्रभावित करने लगता है।

दो लाख से अधिक वयस्कों पर किया गया 'जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन' का बड़ा शोध

मानसिक स्वास्थ्य और हृदय रोगों के बीच के इस गहरे और छिपे हुए कनेक्शन को दुनिया के सामने लाने वाली यह महत्वपूर्ण रिसर्च प्रतिष्ठित 'जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन' (Journal of the American Heart Association) में प्रकाशित हुई है। इस व्यापक और ऐतिहासिक शोध में दुनिया भर के कुल 2,19,866 ऐसे वयस्क नागरिकों को शामिल किया गया था, जिन्होंने अपने जीवन के किसी न किसी पड़ाव पर किसी गंभीर दर्दनाक घटना या ट्रॉमा का सामना किया था। शोधकर्ताओं ने इन सभी लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का लंबे समय तक बारीकी से अध्ययन किया ताकि यह समझा जा सके कि मानसिक आघात झेलने वाले लोगों के शरीर में किस प्रकार के शारीरिक और जैविक बदलाव आते हैं। इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता जेनिफर ए. समनर (Jennifer A. Sumner) के अनुसार, इन लाखों प्रभावित लोगों में से करीब 44,000 ऐसे मरीज पाए गए जिन्हें अपनी जिंदगी में आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल की गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ा। इनमें से कई लोगों की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को दिल तक खून का संचार फिर से शुरू करने हेतु विशेष मेडिकल ट्रीटमेंट देना पड़ा, तो कई दुर्भाग्यशाली ऐसे भी थे जिन्हें इन्हीं गंभीर कार्डियोवैस्कुलर कारणों के चलते अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा।

मशीन लर्निंग तकनीक की मदद से लगाए गए दिल की बीमारियों के 15 सबसे बड़े कारणों का पता

इस विशालकाय अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने गंभीर रूप से बीमार पड़ने वाले लोगों के स्वास्थ्य डेटा की तुलना उन लोगों से की जो इस तरह की दिल की समस्याओं से सुरक्षित बचे रहे थे। अनुसंधानकर्ताओं ने कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं के पीछे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों को एक सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष संभावित कारण माना। दिल और दिमाग के बीच के इस घातक तालमेल को और अधिक गहराई से समझने के लिए वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। दिल और दिमाग से जुड़ी इन जानलेवा बीमारियों के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार माने जाने वाले मानसिक स्वास्थ्य विकारों के 15 सबसे प्रमुख और अहम कारणों का सटीक पता लगाने के लिए 'मशीन लर्निंग' (Machine Learning) तकनीक का उपयोग किया गया। इस आधुनिक तकनीकी विश्लेषण से यह साफ हो गया कि ट्रॉमा के बाद मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक और मनोवैज्ञानिक बदलाव किस प्रकार शरीर के बाकी अंगों को कमजोर कर देते हैं।

मानसिक दर्द से निपटने के लिए शराब का अत्यधिक सेवन बनता है सबसे बड़ा जोखिम कारक

इस पूरी वैज्ञानिक रिसर्च में जो सबसे डरावनी और आंखें खोल देने वाली बात निकलकर सामने आई, वह थी मानसिक तनाव को मिटाने के लिए अत्यधिक शराब का सेवन करने की खतरनाक आदत। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में यह पाया कि ट्रॉमा के शिकार लोगों में दिल की बीमारियों से जुड़ा हुआ सबसे बड़ा मानसिक स्वास्थ्य जोखिम और कोई नहीं बल्कि शराब की लत और उसका अत्यधिक सेवन ही है। इस विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रमुख शोधकर्ता जेनिफर समनर बताती हैं कि आखिर लोग इस खतरनाक रास्ते पर क्यों चले जाते हैं। उनके अनुसार, "जब कोई आम इंसान अपने जीवन में किसी बड़े सदमे, दुर्घटना या बुरे अनुभव से गुजरता है, तो उसके भीतर एक भारी मानसिक उथल-पुथल मच जाती है।" इस असहनीय मानसिक दर्द और भावनात्मक आघात से निपटने तथा उस बेचैनी को संभालने के लिए लोग अक्सर जाने-अनजाने शराब का सहारा लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि शराब पीने से उनका दर्द कुछ समय के लिए कम हो जाएगा, लेकिन यही अस्थायी राहत की आदत आगे चलकर उनके दिल और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम के लिए बेहद घातक साबित होती है। अत्यधिक शराब पीने से रक्तचाप बढ़ता है, धमनियां कमजोर होती हैं और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा चरम पर पहुंच जाता है। इसलिए मानसिक आघात के समय नशीले पदार्थों से दूरी बनाकर सही चिकित्सा और मनोचिकित्सक की सलाह लेना ही बुद्धिमानी है।