National Youth Day 2026 : जब करियर और रिश्तों का बोझ भारी लगने लगे, तो स्वामी विवेकानंद की ये 5 बातें देंगी आपको नया हौसला
News India Live, Digital Desk : हर साल 12 जनवरी आती है और हम 'राष्ट्रीय युवा दिवस' मनाकर आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन क्या हमने कभी रुककर सोचा है कि जिस "युवा शक्ति" की बात स्वामी विवेकानंद करते थे, क्या हम आज वैसा बन पाए हैं?
आज की दुनिया रील (Reels), करियर की होड़ और हर पल बदलती एआई (AI) की दुनिया है। यहाँ हम डिप्रेशन और तनाव के शिकार जल्दी हो रहे हैं। ऐसे में विवेकानंद के वो पुराने, मगर अनमोल शब्द किसी ठंडी हवा के झोंके जैसे लगते हैं। आइए, आज के संदर्भ में उनके कुछ मंत्रों को फिर से समझते हैं।
1. खुद को कम समझना ही सबसे बड़ा पाप है
आज हम दूसरों की इंस्टाग्राम प्रोफाइल देखकर अपनी तुलना करने लगते हैं और खुद को छोटा महसूस करते हैं। विवेकानंद ने साफ़ कहा था कि जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक भगवान भी आपकी मदद नहीं कर सकते। अपनी काबिलियत को किसी और के तराजू में मत तौलिए। आपकी असल ताकत आपके अंदर है, किसी गैजेट या सर्टिफिकेट में नहीं।
2. "उठो, जागो और तब तक मत रुको..."—क्या हम थक गए हैं?
हम अक्सर दो-चार असफलताओं के बाद यह सोचने लगते हैं कि "यह मेरे बस का नहीं है"। स्वामी जी ने कहा था—"उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" 2026 की गलाकाट कॉम्पिटिशन वाली दुनिया में यह बात सबसे ज़्यादा फिट बैठती है। हार सिर्फ एक स्टॉप है, आखिरी मंजिल नहीं।
3. एक विचार को अपनी जिंदगी बना लो
मल्टीटास्किंग के दौर में हमारा दिमाग 10 जगहों पर बटा रहता है। स्वामी विवेकानंद कहते थे कि किसी एक विचार को लो और उसी को अपनी जिंदगी बना लो। उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, और अपने शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूबा रहने दो। यह 'फोकस' का सबसे बड़ा मंत्र है। अगर आप पढ़ाई कर रहे हैं या बिज़नेस—बस एक लक्ष्य पर अपनी पूरी ताकत लगा दें।
4. पवित्रता, धैर्य और दृढ़ता
विवेकानंद जी के मुताबिक, कामयाबी का कोई शॉर्टकट नहीं होता। पवित्र इरादा, काम के प्रति धैर्य और मुसीबत में भी डटे रहने की आदत ही एक आम इंसान को खास बनाती है। आजकल हमें सब कुछ 'इन्सटेंट' चाहिए, लेकिन असली सफलता समय मांगती है।
एक साधारण बालक 'नरेंद्र' से 'स्वामी' बनने का सबक
विवेकानंद कोई पैदाइशी देवता नहीं थे। उन्होंने सवाल किए, वो भटके, उन्होंने गरीबी देखी और समाज की कड़वी सच्चाईयों को महसूस किया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 39 साल की छोटी सी उम्र में वो दुनिया को जो दे गए, वो हजारों सालों के लिए काफी है।
आज के युवा होने के नाते, हमारी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ नौकरी पाना या पैसा कमाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा चरित्र बनाना है जो देश और समाज के काम आए। इस 'राष्ट्रीय युवा दिवस' पर चलिए खुद से वादा करते हैं कि हम भीड़ का हिस्सा नहीं बनेंगे, बल्कि अपनी मेहनत से अपनी अलग पहचान बनाएंगे।
याद रखिये, आप ही अपने भाग्य के निर्माता हैं