National Education Policy : क्लास-1 में 6 साल की उम्र का नियम, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
News India Live, Digital Desk: National Education Policy : दिल्ली में पहली कक्षा में दाखिले के लिए बच्चे की न्यूनतम उम्र 6 साल करने के नियम को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. दिल्ली सरकार के इस फैसले के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की बेंच ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि इस नियम को क्यों लागू किया जा रहा है.अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DoE) ने इसी साल जून में एक सर्कुलर जारी किया था.इस सर्कुलर में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत, अकादमिक सत्र 2026-27 से पहली कक्षा में दाखिले के लिए बच्चे की उम्र 6 साल पूरी होनी अनिवार्य होगी. यानी, जिस साल बच्चे का एडमिशन होना है, उस साल 31 मार्च तक उसकी उम्र 6 साल हो जानी चाहिए.
सरकार का तर्क है कि यह नियम बच्चों के बेहतर मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए जरूरी है और यह नई शिक्षा नीति के अनुरूप भी है. NEP 2020 के तहत, स्कूली शिक्षा के पहले पांच साल को "फाउंडेशनल स्टेज" माना गया है, जिसमें 3 साल की प्री-स्कूलिंग और फिर क्लास 1 और 2 शामिल हैं.
पेरेंट्स ने क्यों किया विरोध?
सरकार के इस फैसले से कई पेरेंट्स परेशान हैं. याचिकाकर्ता दीपिका शर्मा की ओर से वकील वैभव शर्मा ने कोर्ट को बताया कि इस नए नियम से पेरेंट्स पर कई तरह का बोझ पड़ेगा.
- पढ़ाई का एक साल बढ़ेगा: नए नियम के अनुसार, बच्चों को क्लास 1 में दाखिले से पहले तीन साल की प्री-स्कूल शिक्षा (प्री-स्कूल 1, 2 और 3) पूरी करनी होगी पहले नर्सरी और केजी के बाद सीधे पहली कक्षा में दाखिला हो जाता था. इससे बच्चों का एक साल बढ़ जाएगा और जो बच्चे पहले से ही पढ़ रहे हैं उन्हें एक क्लास दोहरानी पड़ सकती है
- आर्थिक बोझ: पढ़ाई का एक साल बढ़ने का सीधा मतलब है कि पेरेंट्स पर एक साल की फीस का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
- सीटों की मारा-मारी: याचिका में यह भी कहा गया है कि क्लास 1 में सीधे दाखिले के लिए सीटें वैसे ही बहुत कम होती हैं. इस नए नियम से कॉम्पिटिशन और भी बढ़ जाएगा
याचिका में सुझाव दिया गया है कि अगर सरकार को यह नियम लागू करना ही है, तो नर्सरी (प्री-स्कूल 1) में दाखिले की उम्र 3 साल से बढ़ाकर 4 साल कर देनी चाहिए, ताकि बच्चे 6 साल की उम्र में पहली कक्षा तक पहुंच सकें और जो बच्चे अभी पढ़ रहे हैं उनका साल बर्बाद न हो
अब सबकी नज़रें दिल्ली सरकार के जवाब और हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं. यह फैसला लाखों बच्चों के भविष्य और उनके माता-पिता की योजनाओं पर सीधा असर डालेगा.