Mythological Story : जब क्रोधित माँ काली को शांत करने के लिए महादेव ने लिया बटुक अवतार ,जानिए यह पौराणिक कथा
News India Live, Digital Desk : हिंदू धर्म ग्रंथों में माँ काली को शक्ति का सबसे रौद्र और विनाशकारी रूप माना गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब माँ काली का क्रोध सातवें आसमान पर था और पूरी सृष्टि थर-थर कांप रही थी, तब उन्हें शांत करने के लिए भगवान शिव को एक नन्हे बालक का रूप धारण करना पड़ा था? इस दिव्य रूप को ही 'बटुक भैरव' (Batuk Bhairav) कहा जाता है। आइए जानते हैं उस पौराणिक काल की कथा, जब ममता ने रौद्र रूप पर विजय प्राप्त की थी।
रौद्र रूप में माँ काली और सृष्टि का संकट
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय रक्तबीज और अन्य भयंकर असुरों का संहार करते हुए माँ काली इतनी अधिक क्रोधित हो गईं कि उनका संहार रुकने का नाम नहीं ले रहा था। असुरों का वध करने के बाद भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ और वे संपूर्ण सृष्टि का विनाश करने के मार्ग पर निकल पड़ीं। देवराज इंद्र सहित सभी देवता भयभीत होकर भगवान शिव की शरण में पहुँचे और रक्षा की गुहार लगाई।
महादेव का 'बटुक' अवतार और माँ का वात्सल्य
भगवान शिव जानते थे कि इस समय माँ काली को बल या शस्त्र से शांत नहीं किया जा सकता। तब महादेव ने अपनी माया से एक नन्हे बालक (बटुक) का रूप धारण किया और युद्धभूमि में बीच रास्ते में लेटकर जोर-जोर से रोने लगे। जैसे ही माँ काली वहां पहुँचीं, एक अबोध बालक को रोता देख उनका हृदय ममता से भर गया। उनका क्रोध क्षण भर में शांत हो गया और उन्होंने बालक को अपनी गोद में उठा लिया।
कैसे पड़ा 'बटुक भैरव' नाम?
जब माँ काली ने उस बालक को प्रेम से दुलारा, तब महादेव अपने वास्तविक स्वरूप में आए। माँ काली के क्रोध को शांत करने के कारण ही भगवान शिव के उस बाल रूप को 'बटुक भैरव' कहा गया। तंत्र शास्त्र में बटुक भैरव को माँ काली का पुत्रवत स्वरूप माना जाता है और इनकी पूजा से न केवल भय का नाश होता है, बल्कि जातक को माँ काली का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।