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April 10 2026 05:36 pm

चैत्र नवरात्रि का 7वां दिन आज माँ कालरात्रि की पूजा से दूर होंगे सारे संकट, जानें शुभ रंग, भोग और मंत्र

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News India Live, Digital Desk: चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन (सप्तमी तिथि) माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप 'माँ कालरात्रि' (Maa Kalratri) की उपासना की जाती है। माँ कालरात्रि को यंत्र, मंत्र और तंत्र की देवी माना गया है। इनका स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन वे अपने भक्तों को सदैव शुभ फल देने वाली हैं, इसीलिए इन्हें 'शुभंकरी' भी कहा जाता है। मान्यता है कि कालरात्रि की पूजा करने वाले साधक को अकाल मृत्यु, रोग और शत्रुओं का भय कभी नहीं सताता।

माँ कालरात्रि का स्वरूप और महाशक्ति

देवी कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। उनके बाल बिखरे हुए हैं और गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह गोल हैं और इनकी नासिका से अग्नि की भयंकर ज्वालाएं निकलती हैं। माँ का वाहन गधा (गर्धब) है और वे अपने चार हाथों में खड्ग, लौह अस्त्र, वरमुद्रा और अभयमुद्रा धारण किए हुए हैं।

सप्तमी तिथि की पूजा विधि और शुभ रंग

शुभ रंग (Lucky Colour): नवरात्रि के सातवें दिन 'नीला' (Royal Blue) रंग पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह रंग शक्ति, साहस और शांति का प्रतीक है।

विशेष भोग (Bhog): माँ कालरात्रि को 'गुड़' (Jaggery) का भोग लगाना सबसे प्रिय है। पूजा के बाद गुड़ को ब्राह्मणों को दान करना चाहिए या प्रसाद के रूप में बांटना चाहिए।

पूजा विधि: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर नीले या साफ वस्त्र पहनें। माँ की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं और उन्हें लाल फूल, अक्षत और धूप अर्पित करें। सप्तमी की रात को 'निशिता काल' पूजा का विशेष महत्व है।

माँ कालरात्रि का सिद्ध मंत्र

पूजा के समय इस मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और विजय प्राप्त होती है:

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा। वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥