मोहम्मद यूनुस का सेवन सिस्टर्स वाला बयान क्या बांग्लादेश बदल रहा है अपनी कूटनीतिक चाल? भारत का नाम न लेने पर मचा बवाल

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News India Live, Digital Desk : बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर संबोधन के दौरान भारत के पूर्वोत्तर राज्यों यानी 'सेवन सिस्टर्स' का जिक्र तो किया, लेकिन गौर करने वाली बात यह रही कि उन्होंने एक बार भी 'भारत' का नाम नहीं लिया। उनके इस अंदाज को कूटनीतिक गलियारों में एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या कहा मोहम्मद यूनुस ने?

एक साक्षात्कार और हालिया चर्चाओं के दौरान यूनुस ने कहा कि "सेवन सिस्टर्स के लिए बांग्लादेश एक स्वाभाविक प्रवेश द्वार (Gateway) है।" उन्होंने व्यापार और कनेक्टिविटी की बात करते हुए इन सात राज्यों की आर्थिक संभावनाओं पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि सीधे राज्यों का नाम लेना और संप्रभु देश (भारत) का नाम न लेना कूटनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ लग सकता है।

भारत के लिए चिंता का विषय क्यों?

भारत के पूर्वोत्तर राज्य (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश) भौगोलिक रूप से बांग्लादेश से घिरे हुए हैं। शेख हसीना के कार्यकाल में भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा और कनेक्टिविटी को लेकर बेहतरीन तालमेल था।

यूनुस के इस बयान के पीछे के संभावित कारण:

नया समीकरण: क्या बांग्लादेश भारत के इन राज्यों के साथ सीधे संबंध विकसित करने की कोशिश कर रहा है?

सुरक्षा चिंताएं: पूर्वोत्तर में सक्रिय अलगाववादी समूहों के लिए बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल न हो, यह भारत की सबसे बड़ी चिंता रही है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव: क्या यूनुस किसी बाहरी शक्ति के प्रभाव में आकर भारत के प्रभाव को कम दिखाना चाहते हैं?

विशेषज्ञों की राय

Foreign Policy के जानकारों का कहना है कि मोहम्मद यूनुस का यह बयान 'इकोनॉमिक हब' बनाने की उनकी मंशा को दर्शाता है, लेकिन संप्रभुता के सम्मान के बिना यह भारत के साथ रिश्तों में खटास पैदा कर सकता है। भारत पहले ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर सतर्क है।

सेवन सिस्टर्स का महत्व:

कनेक्टिविटी: चिकन नेक (Siliguri Corridor) के विकल्प के रूप में बांग्लादेश का रास्ता भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

व्यापार: बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह का उपयोग इन राज्यों के विकास के लिए जरूरी है।

स्थिरता: पूर्वोत्तर में शांति के लिए बांग्लादेश का सहयोग अनिवार्य है।