आतंकवाद पर ट्रंप का महाप्रहार नाइजीरिया के जंगलों में उतरेंगे 100 अमेरिकी कमांडो, बोको हरम और ISWAP का होगा खात्मा!

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News India Live, Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफ्रीका में आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने उत्तरी नाइजीरिया में 100 विशेष अमेरिकी सैनिकों (US Troops) की तैनाती को मंजूरी दे दी है। यह मिशन मुख्य रूप से दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी गुटों में शुमार 'बोको हरम' और 'इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस' (ISWAP) के सफाए के लिए तैयार किया गया है।

ट्रंप की नई 'आतंकवाद विरोधी' रणनीति

पिछले कुछ वर्षों में नाइजीरिया और चाड बेसिन क्षेत्र में उग्रवाद तेजी से बढ़ा है। ट्रंप का मानना है कि यदि इन संगठनों को समय रहते नहीं रोका गया, तो ये वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। इन 100 सैनिकों का मुख्य कार्य नाइजीरियाई सेना को खुफिया जानकारी (Intelligence) देना, ड्रोन निगरानी करना और जटिल ऑपरेशनों में रणनीतिक सहायता प्रदान करना होगा।

क्यों चुना गया उत्तरी नाइजीरिया?

उत्तरी नाइजीरिया लंबे समय से बोको हरम का गढ़ रहा है। यहाँ से आतंकी न केवल नाइजीरिया, बल्कि पड़ोसी देशों—कैमरून, चाड और नाइजर में भी हमले करते हैं।

ISWAP का खतरा: यह संगठन अब बोको हरम से भी अधिक संगठित और घातक हो गया है।

मानवीय संकट: आतंकवाद के कारण यहाँ लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

अमेरिकी हित: अफ्रीका में स्थिरता अमेरिका के आर्थिक और सुरक्षा हितों के लिए महत्वपूर्ण है।

सैनिकों की भूमिका और चुनौतियाँ

ये 100 अमेरिकी सैनिक सीधे तौर पर युद्ध के मैदान में उतरने के बजाय 'ट्रेन एंड एडवाइज' (प्रशिक्षण और सलाह) की भूमिका में रहेंगे। हालांकि, उनके पास आत्मरक्षा और आतंकवादियों के ठिकानों को चिन्हित करने के लिए उन्नत तकनीक और हथियार होंगे। चुनौती यह है कि नाइजीरिया के घने जंगलों (सांलिसा फॉरेस्ट) में आतंकियों को ढूंढना बेहद मुश्किल काम है।

विपक्ष और विशेषज्ञों की राय

अमेरिका में कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की यह छोटी लेकिन 'सर्जिकल' तैनाती 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' की पुरानी नीति से अलग है। यह कम लागत में अधिक प्रभावी परिणाम देने की कोशिश है। वहीं, नाइजीरियाई सरकार ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे आतंकवाद के खिलाफ जंग में एक निर्णायक मोड़ बताया है।

मुख्य हाइलाइट्स:

सैन्य बल: 100 स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स।

मुख्य लक्ष्य: बोको हरम और ISWAP के कमांडर।

तकनीक: सैटेलाइट इमेजरी और प्रीडेटर ड्रोन का उपयोग।

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