शेख हसीना की घर वापसी पर अड़ी BNP ,क्या तारिक रहमान का दांव बिगाड़ेगा भारत-बांग्लादेश के रिश्ते?

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News India Live, Digital Desk : बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने एक बड़ा बयान देते हुए भारत से शेख हसीना को वापस भेजने की मांग तेज कर दी है। लंदन से अपनी वापसी की तैयारी कर रहे रहमान ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ भविष्य के संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि दिल्ली शेख हसीना के 'प्रत्यर्पण' पर क्या रुख अपनाती है।

हसीना का प्रत्यर्पण: सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती

शेख हसीना वर्तमान में भारत में शरण लिए हुए हैं। बांग्लादेश में उनके खिलाफ हत्या और मानवाधिकारों के उल्लंघन के सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं। तारिक रहमान का कहना है कि न्याय की खातिर हसीना का सामना बांग्लादेशी अदालतों से होना चाहिए।

भारत के लिए यह स्थिति 'इधर कुआं, उधर खाई' जैसी है। एक तरफ भारत के अपने पुराने सहयोगी (शेख हसीना) के प्रति नैतिक दायित्व हैं, वहीं दूसरी तरफ उसे बांग्लादेश की नई और भावी सत्ता (BNP और अंतरिम सरकार) के साथ संबंधों को सामान्य बनाए रखना है।

तारिक रहमान की संभावित 'ताजपोशी' और भारत का रुख

लंबे समय से निर्वासन में रह रहे तारिक रहमान अब बांग्लादेश की सत्ता संभालने के करीब दिख रहे हैं। उन्होंने भारतीय नेतृत्व को संदेश दिया है कि वे व्यापार और सुरक्षा के मुद्दों पर सहयोग के लिए तैयार हैं, लेकिन भारत को "एक व्यक्ति" (हसीना) के बजाय "पूरे बांग्लादेश" के साथ खड़े होने की जरूरत है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पड़ने वाले 3 बड़े असर:

सुरक्षा सहयोग: शेख हसीना के समय भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के आतंकियों के खिलाफ बांग्लादेश ने कड़ी कार्रवाई की थी। क्या बीएनपी सरकार भी वही सहयोग जारी रखेगी?

कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स: रेलवे और पोर्ट कनेक्टिविटी के कई बड़े प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं। राजनीतिक अस्थिरता इन्हें प्रभावित कर सकती है।

अल्पसंख्यक सुरक्षा: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर भारत पहले ही अपनी चिंता जता चुका है। तारिक रहमान ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है, लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

दक्षिण एशियाई मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत को अब 'वेट एंड वॉच' (इंतज़ार करो और देखो) की नीति अपनानी होगी। बीएनपी के साथ संवाद के रास्ते खोलना जरूरी है, लेकिन शेख हसीना का प्रत्यर्पण करना भारत की 'शरण देने की छवि' (Safe Haven Image) को नुकसान पहुंचा सकता है।