ट्रंप की वॉर्निंग से हिला मिडिल ईस्ट जिनेवा में अमेरिका-ईरान की महाबैठक, क्या टल जाएगा युद्ध का खतरा

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News India Live, Digital Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जिनेवा में मंगलवार (17 फरवरी 2026) को होने वाली परमाणु वार्ता के दूसरे दौर से पहले ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान समझौते की मेज पर ठोस कदम नहीं उठाता, तो उसे "बेहद दर्दनाक" (Very Traumatic) परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। इस धमकी के साथ ही अमेरिका ने क्षेत्र में अपना दूसरा विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) तैनात कर दिया है।

जिनेवा वार्ता: आखिरी मौका या युद्ध की आहट?

ओमान की मध्यस्थता में शुरू हुई इस 'अप्रत्यक्ष वार्ता' का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष को रोकना है।

अमेरिकी प्रतिनिधि: ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर इस बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं।

ईरान का रुख: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि वे "निष्पक्ष समझौते" के लिए तैयार हैं, लेकिन "धमकियों के आगे झुकेंगे नहीं।"

इज़राइल की मांग और ट्रंप का समर्थन

इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी। इज़राइल का स्पष्ट कहना है कि ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन की कोई भी क्षमता नहीं बचनी चाहिए। ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो वे इज़राइल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए जाने वाले 'सर्जिकल स्ट्राइक' का समर्थन कर सकते हैं।

क्यों डरा हुआ है इज़राइल?

भले ही ट्रंप ईरान को धमका रहे हैं, लेकिन इज़राइल के भीतर यह चिंता है कि यदि वार्ता पूरी तरह विफल हुई, तो ईरान और उसके समर्थित गुट (हिजबुल्लाह, हमास) इज़राइल पर बड़ा पलटवार कर सकते हैं। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी या इज़राइली हमले का जवाब पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और इज़राइल पर मिसाइल हमलों से दिया जाएगा।

ट्रंप का 'फेज-2' प्लान

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे अगले एक महीने के भीतर नतीजा चाहते हैं। यदि समझौता नहीं होता, तो अमेरिका 'फेज-2' (Phase Two) लागू करेगा, जिसमें और अधिक कड़े आर्थिक प्रतिबंध और संभावित सैन्य कार्रवाई शामिल है। ट्रंप ने यहाँ तक कहा कि ईरान में "सत्ता परिवर्तन" (Regime Change) सबसे अच्छा समाधान होगा।

घटनाक्रम के मुख्य बिंदु:

तारीख: 17 फरवरी 2026, जिनेवा समिट।

सैन्य दबाव: क्षेत्र में दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर की मौजूदगी।

विवादित मुद्दा: परमाणु संवर्धन, बैलिस्टिक मिसाइलें और क्षेत्रीय गुटों को समर्थन।