मोबाइल की स्क्रीन ने छीन ली है आंखों की चमक? नेत्र तर्पण है इसका सदियों पुराना आयुर्वेदिक इलाज

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News India Live, Digital Desk: आज की दुनिया में हमारी आंखें शायद सबसे ज़्यादा मेहनत करती हैं। सुबह उठते ही मोबाइल, दिन भर ऑफिस में कंप्यूटर की स्क्रीन और रात में फिर से टीवी या लैपटॉप... इस डिजिटल ज़िंदगी का सबसे बुरा असर हमारी आंखों पर पड़ रहा है। आंखों में जलन, सूखापन, खुजली और समय से पहले चश्मा लग जाना अब आम बात हो गई है।

अगर आप भी अपनी थकी हुई आंखों को आराम देना चाहते हैं और उनकी खोई हुई चमक वापस पाना चाहते हैं, तो आयुर्वेद में इसका एक सदियों पुराना और चमत्कारी समाधान मौजूद है - नेत्र तर्पण

क्या है यह 'नेत्र तर्पण' थेरेपी?

'नेत्र तर्पण' एक संस्कृत शब्द है, जिसका मतलब है 'आंखों को पोषण देना'। यह एक तरह का आयुर्वेदिक आई-स्पा है, जिसमें औषधीय गुणों वाले गुनगुने घी या तेल से आंखों की मालिश की जाती है। इस प्रक्रिया में आंखों के चारों ओर उड़द दाल के आटे की एक बाउंड्री (या बांध) बनाई जाती है और फिर उसमें औषधीय घी भरा जाता है।

यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह थेरेपी आंखों के लिए किसी जादू से कम नहीं है।

कैसे काम करती है यह थेरेपी और क्या हैं इसके फायदे?

जब औषधीय गुणों वाला गुनगुना घी आंखों के संपर्क में आता है, तो यह आंखों की मांसपेशियों को आराम देता है और आंखों के अंदर गहराई तक जाकर उन्हें पोषण देता है। इसके नियमित इस्तेमाल से कई फायदे होते हैं:

  1. ड्राई आई सिंड्रोम से छुटकारा: जो लोग घंटों स्क्रीन पर काम करते हैं, उनकी आंखों में सूखापन या 'ड्राई आई सिंड्रोम' की समस्या हो जाती है। नेत्र तर्पण आंखों में नमी लौटाता है और इस समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद करता है।
  2. थकी और तनावग्रस्त आंखों को आराम: यह थेरेपी आंखों की मांसपेशियों के तनाव को कम करती है, जिससे आंखों की थकान और भारीपन दूर होता है।
  3. आंखों की रोशनी बढ़ाए: नेत्र तर्पण आंखों की नसों को मजबूत करता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, जिससे धीरे-धीरे आंखों की रोशनी में भी सुधार होता है। यह उन बच्चों के लिए भी बहुत फायदेमंद है जिन्हें कम उम्र में चश्मा लग गया है।
  4. डार्क सर्कल्स (काले घेरे) कम करे: आंखों के आसपास रक्त संचार बेहतर होने से डार्क सर्कल्स की समस्या में भी कमी आती है।
  5. एलर्जी और जलन से राहत: आंखों में बार-बार होने वाली एलर्जी, खुजली और जलन से भी यह थेरेपी राहत दिलाती है।

कैसे की जाती है यह प्रक्रिया?

यह एक बहुत ही आरामदायक प्रक्रिया है, जिसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।

  • सबसे पहले व्यक्ति को आराम से लिटाया जाता है।
  • फिर, आंखों के चारों ओर उड़द दाल के पेस्ट से एक गोलाकार बांध बनाया जाता है, ताकि घी बाहर न बहे।
  • इसके बाद, पहले से तैयार किए गए औषधीय घी को गुनगुना करके धीरे-धीरे इस बांध के अंदर भरा जाता है, जब तक कि पलकें पूरी तरह से घी में डूब न जाएं।
  • व्यक्ति को कुछ मिनटों के लिए धीरे-धीरे अपनी आंखें खोलने और बंद करने के लिए कहा जाता है, ताकि घी आंखों के हर कोने तक पहुंच सके।
  • निर्धारित समय के बाद घी को निकालकर आंखों को हल्के गर्म पानी से साफ कर दिया जाता है।

यह थेरेपी उन सभी लोगों के लिए एक वरदान है जो अपनी आंखों से ज़्यादा काम लेते हैं। यह न सिर्फ आंखों की समस्याओं को दूर करती है, बल्कि दिमाग को भी शांति और सुकून देती है।