Mission 2027 : बीजेपी के सामने संतुलन की बड़ी चुनौती, नई टीम बनाने में फंसा है यह पेंच
News India Live, Digital Desk : इस समय लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सबसे बड़ी चर्चा एक ही बात की है 'यूपी बीजेपी की नई टीम कैसी होगी?' सुनने में यह एक रूटीन प्रक्रिया लगती है, लेकिन अंदरखाने की खबर यह है कि इस बार कार्यकारिणी (Executive Committee) बनाना नेताओं के लिए लोहे के चने चबाने जैसा हो गया है।
आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर मामला फंसा कहाँ है।
संतुलन की 'टाइटरोप वॉक' (Tightrope Walk)
उत्तर प्रदेश कोई छोटा-मोटा राज्य नहीं है। यहाँ पश्चिम, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध और ब्रज—हर इलाके का अपना एक अलग सियासी मिजाज है। बीजेपी के सामने सबसे बड़ी मुसीबत 'रीजनल बैलेंस' यानी क्षेत्रीय संतुलन साधने की है।
अगर पश्चिम यूपी से ज्यादा लोगों को पद दे दिए, तो पूर्वांचल वाले नाराज हो सकते हैं। अगर बुंदेलखंड की अनदेखी हुई, तो वहां वोट बैंक खिसक सकता है। लोकसभा चुनावों में जो थोड़ी बहुत कमी-वेशी रह गई थी, पार्टी उसे इस नई टीम के जरिए भरना चाहती है। इसलिए, हर एक नाम को फाइनल करने से पहले सौ बार सोचा जा रहा है।
जाति और अनुभव का मेल
सिर्फ इलाका ही नहीं, जातिगत समीकरण भी यूपी की राजनीति की धुरी है। पार्टी को पिछड़े, अति-पिछड़े, दलित और सामान्य वर्ग—सभी को खुश रखना है। चुनौती यह है कि पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं को भी सम्मान मिले और नई ऊर्जा वाले युवाओं को भी मौका दिया जाए।
सूत्र बता रहे हैं कि इस बार टीम में 'सिफारिश' से ज्यादा 'काम' पर जोर दिया जाएगा। यानी जिसके पास जमीनी पकड़ है और जो अपने इलाके में वोट ला सकता है, उसी का पलड़ा भारी रहेगा।
क्यों अहम है यह नई टीम?
आप सोच रहे होंगे कि अभी 2027 में तो बहुत टाइम है, इतनी जल्दी क्या है? दरअसल, यह नई टीम ही 2027 की नींव रखेगी। अगर अभी संगठन में नाराजगी पैदा हो गई, तो उसका असर चुनाव तक बना रह सकता है। विपक्ष भी अपनी गोटियां बिछा रहा है, ऐसे में बीजेपी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।
कुल मिलाकर, बीजेपी एक ऐसी 'परफेक्ट इलेवन' बनाने की कोशिश में है जो बल्लेबाजी (प्रचार) भी धाकड़ करे और गेंदबाजी (रणनीति) में भी विपक्षी के विकेट उखाड़ दे।
अब देखना दिलचस्प होगा कि जब लिस्ट बाहर आती है, तो किसके चेहरे पर मुस्कान होगी और कौन रह जाएगा खाली हाथ। यह संतुलन का खेल ही 2027 की तस्वीर साफ़ करेगा।