मिडिल ईस्ट महायुद्ध का भारतीय रसोई पर प्रहार: गैस के लिए मची हाहाकार, सरकार ने लागू किया ECA; अब 25 दिन बाद ही होगा अगला सिलेंडर बुक

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नई दिल्ली/मुंबई: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े भीषण सैन्य संघर्ष की तपिश अब भारतीय रसोई तक पहुंच गई है। खाड़ी देशों से होने वाली गैस सप्लाई बाधित होने के कारण देश के कई बड़े शहरों में एलपीजी (LPG) का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे महानगरों में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें नजर आ रही हैं। बुकिंग के 8 से 10 दिन बीत जाने के बाद भी सिलेंडरों की डिलीवरी नहीं हो पा रही है। इस आपात स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे देश में 'एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955' (ECA) लागू कर दिया है और बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से थमी सप्लाई की रफ्तार

भारत अपनी जरूरत की अधिकांश एलपीजी कतर, यूएई, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों से आयात करता है। ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर पाबंदी लगाए जाने के कारण समुद्री मार्ग से आने वाले गैस टैंकरों का रास्ता रुक गया है। सप्लाई चेन टूटने का असर यह हुआ कि देश के कई हिस्सों में होटलों और ढाबों पर ताले लटकने की नौबत आ गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक आपूर्ति को नियंत्रित करना अनिवार्य है। इसी क्रम में सरकार ने अब घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग की समयसीमा को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके।

क्या है एसेंशियल कमोडिटी एक्ट और कैसे बदलेगा वितरण?

आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) लागू होने के बाद अब सरकार के पास गैस के भंडारण, वितरण और कीमतों को पूरी तरह नियंत्रित करने का कानूनी अधिकार आ गया है। इस कानून के तहत सरकार ने गैस आपूर्ति को चार मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली प्राथमिकता में घरेलू उपभोक्ता, पीएनजी (PNG) और सीएनजी (CNG) को रखा गया है, जिन्हें पूरी सप्लाई दी जाएगी। दूसरी श्रेणी में उर्वरक कारखानों को 70% गैस मिलेगी। तीसरी श्रेणी में नेशनल ग्रिड से जुड़े बड़े उद्योग और चाय फैक्ट्रियां होंगी, जबकि चौथी और अंतिम श्रेणी में छोटे कारखाने और होटलों को रखा गया है, जिन्हें सबसे अंत में बची हुई गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

महंगी हुई रसोई: घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़े

सप्लाई के संकट के बीच आम आदमी पर महंगाई का दोहरा वार हुआ है। अप्रैल 2025 के बाद पहली बार सरकार ने घरेलू रसोई गैस की कीमतों में इजाफा किया है। 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर के दाम में ₹60 की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, कमर्शियल इस्तेमाल वाले 19 किलो के सिलेंडर की कीमतों में ₹115 की भारी वृद्धि की गई है। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत और सीमित उपलब्धता के कारण कीमतें बढ़ाना मजबूरी हो गया है। तेल रिफाइनरियों को भी आदेश दिया गया है कि वे औद्योगिक कार्यों के बजाय एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता दें।

अब बिना ओटीपी और बायोमेट्रिक नहीं मिलेगा सिलेंडर

गैस की कालाबाजारी और अवैध व्यापार को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने डिलीवरी प्रक्रिया को हाई-टेक बना दिया है। अब डिलीवरी एजेंट बिना ओटीपी (OTP) या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के सिलेंडर नहीं दे पाएंगे। उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाला ओटीपी साझा करने के बाद ही डिलीवरी सफल मानी जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने तीन प्रमुख तेल कंपनियों के विशेषज्ञों की एक हाई-लेवल मॉनिटरिंग कमेटी बनाई है, जो हर जिले में गैस के स्टॉक और वितरण की पल-पल की रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

33 करोड़ उपभोक्ताओं की चिंता, सरकार की अपील

भारत में वर्तमान में 33.2 करोड़ गैस उपभोक्ता हैं, जिनकी सालाना खपत लगभग 33.15 मीट्रिक टन है। इतनी बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करना सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। नागरिक उड्डयन और ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारी लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में हैं ताकि वैकल्पिक मार्गों से गैस की खेप मंगवाई जा सके। सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे 'पैनिक बाइंग' यानी घबराहट में आकर अतिरिक्त सिलेंडर जमा न करें। सरकार का दावा है कि आवश्यक सेवाओं के लिए पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित रखा गया है और जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पा लिया जाएगा।