Mesh Sankranti 2026 : नौकरी में आ रही बाधाएं होंगी दूर सूर्य देव के इस महापरिवर्तन पर करें ये उपाय, चमक जाएगी किस्मत
News India Live, Digital Desk: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे 'मेष संक्रांति' कहा जाता है। सौर मंडल के राजा सूर्य का यह राशि परिवर्तन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में मेष सूर्य की 'उच्च' राशि है। साल 2026 में मेष संक्रांति का पर्व अप्रैल के मध्य में मनाया जाएगा। यदि आप करियर में तरक्की चाहते हैं या लंबे समय से नौकरी में परेशानियों का सामना कर रहे हैं, तो सूर्य देव की कृपा पाने के लिए यह दिन सर्वोत्तम है।
मेष संक्रांति 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य का मेष राशि में गोचर इस समय होगा:
मेष संक्रांति की तारीख: 14 अप्रैल 2026, मंगलवार।
पुण्य काल मुहूर्त: सुबह 06:05 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक।
महापुण्य काल मुहूर्त: सुबह 06:05 बजे से सुबह 08:21 बजे तक।
विशेष: संक्रांति के दिन किया गया स्नान और दान अक्षय फल प्रदान करता है।
नौकरी और करियर में सफलता के अचूक उपाय
कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होने पर मान-सम्मान और सरकारी नौकरी के योग बनते हैं। मेष संक्रांति पर ये उपाय जरूर करें:
सूर्य को अर्घ्य: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करें।
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ: यदि ऑफिस में राजनीति या प्रमोशन में रुकावट आ रही है, तो इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का तीन बार पाठ करें। यह आत्मविश्वास बढ़ाता है और शत्रुओं पर विजय दिलाता है।
तांबे और गुड़ का दान: सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए मेष संक्रांति पर तांबे के बर्तन, गुड़, गेहूं और लाल वस्त्र का दान किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को करें।
पिता का आशीर्वाद: ज्योतिष में सूर्य 'पिता' के कारक हैं। इस दिन अपने पिता या पिता समान व्यक्तियों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें, इससे सूर्य दोष शांत होता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व: नए साल की शुरुआत
मेष संक्रांति को भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। पंजाब में इसे बैसाखी, बंगाल में पोइला बैसाख, असम में बोहाग बिहू और केरल में विशु के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से सौर नववर्ष का आरंभ भी माना जाता है। इस दिन सत्तू खाने और जल से भरे घड़े का दान करने की परंपरा है, जो बढ़ती गर्मी से राहत और शीतलता का प्रतीक है।
सूर्य देव को प्रसन्न करने के अन्य तरीके
इस दिन नमक का सेवन कम या बिल्कुल न करें।
लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ रहता है।
गायत्री मंत्र का यथासंभव जाप करें।
संक्रांति के दिन किसी नदी या पवित्र जलाशय में स्नान करने से आरोग्यता की प्राप्ति होती है।