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April 20 2026 04:34 am

Mauritius PM in Ayodhya : अयोध्या में दिखा भारत और मॉरीशस का अटूट रिश्ता, सीएम योगी ने की मेहमाननवाज़ी की सारी हदें पार

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News India Live, Digital Desk: धर्म नगरी अयोध्या की धरती शुक्रवार को एक बेहद ख़ास और ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। यह मौका था मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ के अयोध्या आगमन का। ख़ास बात यह रही कि उनकी अगवानी के लिए खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे, जिन्होंने किसी सामान्य मेहमान की तरह नहीं, बल्कि एक पुराने और बिछड़े हुए भाई की तरह उनका स्वागत किया और उनके लिए रेड कार्पेट बिछाया।

जैसे ही प्रविंद जगन्नाथ अपनी पत्नी के साथ महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे, सीएम योगी ने गर्मजोशी के साथ गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। यह नज़ारा दो देशों के राजनेताओं की औपचारिक मुलाकात जैसा नहीं, बल्कि दो सनातनियों के मिलन जैसा लग रहा था।

रामलला के दर्शन कर निहारे भव्य स्वरूप

हवाई अड्डे से, सीएम योगी मॉरीशस के प्रधानमंत्री को सीधे उसी भव्य राम मंदिर में ले गए, जिसका इंतज़ार दुनिया भर के हिंदुओं ने सदियों तक किया है। गर्भगृह में विराजमान प्रभु श्री रामलला के बाल स्वरूप के दर्शन करते समय प्रविंद जगन्नाथ और उनकी पत्नी की आँखों में एक अलग ही चमक और भावुकता साफ़ देखी जा सकती थी। उन्होंने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ रामलला की पूजा-अर्चना की और आरती में भी शामिल हुए।

पुजारियों ने उन्हें चंदन का टीका लगाया और रामनामी पटका पहनाकर उनका सम्मान किया। सीएम योगी ने उन्हें स्मृति चिन्ह के रूप में भगवान राम की एक सुंदर प्रतिमा भी भेंट की।

सिर्फ एक प्रधानमंत्री नहीं, एक हनुमान भक्त

प्रविंद जगन्नाथ ने इस मौके पर कहा कि उनका देश मॉरीशस "छोटा भारत" है और भगवान हनुमान की उन पर विशेष कृपा है। उन्होंने बताया कि मॉरीशस के लगभग हर घर में हनुमान चालीसा का पाठ होता है। उन्होंने भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की और कहा कि इस मंदिर ने दुनिया भर के हिंदुओं को एक नई ऊर्जा और गर्व की अनुभूति कराई है।

इस दौरे के दौरान, सीएम योगी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री को अयोध्या में हो रहे विकास कार्यों, जैसे कि सरयू घाट का सौंदर्यीकरण और अन्य परियोजनाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। यह दौरा सिर्फ एक राजनयिक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह भारत और मॉरीशस के उस गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्ते का प्रतीक है, जिसकी जड़ें भगवान राम और सनातन धर्म से जुड़ी हैं।