मौनी अमावस्या आज है या कल? 17 या 18 जनवरी की कन्फ्यूजन दूर करें और जानें स्नान का सही मुहूर्त
News India Live, Digital Desk: हमारे हिन्दू धर्म में त्योहारों की तारीख को लेकर अक्सर पंचांग का पेंच फंस जाता है। माघ का महीना चल रहा है और इस महीने की सबसे महत्वपूर्ण तिथि मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) बिलकुल नजदीक है।
लेकिन, जैसे ही कैलेंडर देखते हैं, मन में सवाल उठता है अमावस्या 17 जनवरी (शनिवार) को है या 18 जनवरी (रविवार) को?" क्योंकि गूगल और कैलेंडर अलग-अलग कहानी बता रहे हैं। आज यानी 17 जनवरी की शाम होते-होते यह चर्चा हर घर में होगी।
घबराइए मत, आपकी सारी कन्फ्यूजन हम यहां दूर किए देते हैं।
17 या 18: सही तारीख कौन सी है?
देखिए, हिन्दू धर्म में हम 'उदया तिथि' को मानते हैं, यानी जिस दिन सूर्य उगते वक्त जो तिथि होती है, पूरा दिन वही मानी जाती है।
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 17 जनवरी 2026 को सुबह करीब 04:47 बजे शुरू हो चुकी है। यह तिथि 18 जनवरी 2026 को सुबह करीब 06:17 बजे तक रहेगी।
चूँकि 18 जनवरी की सुबह सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए स्नान और दान का मुख्य पर्व 18 जनवरी (रविवार) को ही मनाया जाना सबसे उत्तम है। साधु-संत भी 18 तारीख की सुबह को ही गंगा स्नान के लिए श्रेष्ठ बता रहे हैं।
मौनी अमावस्या क्यों है इतनी खास?
इस दिन 'मौन' यानी 'चुप' रहने का बहुत महत्व है। कहते हैं कि इंसान सबसे ज्यादा ऊर्जा बोलने में ही खर्च करता है और कभी-कभी गलत बोलकर पाप का भागी भी बनता है।
इस दिन अगर आप सुबह उठकर नहाने और पूजा करने तक चुप रहते हैं (मौन व्रत), तो इसका फल हज़ारों गायों के दान के बराबर माना गया है। यह दिन अपने मन को शांत करने और खुद से जुड़ने का है।
क्या करें (Dos):
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: कोशिश करें कि 18 तारीख को सूरज निकलने से पहले नहा लें। अगर गंगा नदी या किसी तीर्थ पर जाना संभव नहीं है, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिला लें। गंगा मैया का ध्यान करें, फल वही मिलेगा।
- दान-पुण्य: कड़ाके की सर्दी है, ऐसे में तिल, गुड़, कंबल या गर्म कपड़ों का दान किसी जरूरतमंद को करें। यह शनि दोष को भी दूर करता है।
- तुलसी पूजन: शाम के वक्त तुलसी के नीचे घी का दीपक जलाना बेहद शुभ होता है।
क्या न करें (Don'ts): गलती से भी ये काम न करें
- देर तक न सोएं: अमावस्या के दिन देर तक बिस्तर पर पड़े रहना दरिद्रता को न्योता देना है।
- वाद-विवाद से बचें: आज के दिन घर में क्लेश बिल्कुल न करें। चूंकि यह 'मौनी' अमावस्या है, इसलिए कड़वे वचन बोलने से बचें।
- खान-पान: इस दिन पूरी तरह से सात्विक रहें। मांस-मदिरा या तामसिक भोजन (प्याज-लहसुन) का सेवन भूलकर भी न करें।
- सुनसान जगहों से दूरी: अमावस्या की रात को नकारात्मक शक्तियां सक्रिय मानी जाती हैं, इसलिए रात में श्मशान या सुनसान रास्तों पर जाने से बचें।
तो कल सुबह की तैयारी कर लीजिये। शांत रहें, मन में प्रभु का नाम लें और जरूरतमंदों की मदद करें। यही सच्ची पूजा है।