कैलेंडर में मार्क कर लें 2026 में कब है मौनी अमावस्या? 17 या 18 तारीख का कंफ्यूजन करें दूर

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News India Live, Digital Desk : हमारा हिंदू धर्म त्योहारों और खास तिथियों का खजाना है। हर तिथि का अपना एक अलग महत्व होता है, लेकिन जब बात 'मौनी अमावस्या' की आती है, तो श्रद्धा और भाव अपने आप दोगुना हो जाता है। आप भी सोच रहे होंगे कि अभी से 2026 की बात क्यों? अरे भाई, अच्छे कामों की तैयारी पहले से हो, तभी तो सब कुछ विधिवत हो पाता है!

अक्सर माघ महीने की अमावस्या को लेकर लोगों के मन में तारीख का कंफ्यूजन रहता है। सवाल वही पुराना होता हैअमावस्या 17 को मनाएं या 18 जनवरी को? चलिए, आज इत्मिनान से बैठकर इस उलझन को सुलझाते हैं और जानते हैं कि इस दिन ऐसा क्या खास करें जिससे घर में सुख-शांति बनी रहे।

तारीख का पेंच: 17 या 18?

देखिए, हिंदू पंचांग अंग्रेजी कैलेंडर की तरह रात 12 बजे तारीख नहीं बदलता। हमारे यहाँ 'उदया तिथि' (सूर्योदय के समय वाली तिथि) का महत्व सबसे ज्यादा होता है। 2026 में माघ महीने की अमावस्या तिथि का संयोग कुछ ऐसा बन रहा है कि यह 17 जनवरी को शुरू हो रही है, लेकिन इसका सूर्योदय के साथ जो मान्य समय होगा, वह 18 जनवरी की सुबह तक जाएगा।

तो, अगर आप गंगा स्नान और दान-पुण्य का प्लान बना रहे हैं, तो धर्म के जानकारों के अनुसार 18 जनवरी 2026 का दिन ही उदया तिथि के हिसाब से स्नान-दान के लिए श्रेष्ठ माना जाएगा। वैसे, 17 की रात से ही माहौल भक्तिमय हो जाएगा।

'मौन' में छिपा है बड़ा राज

इस अमावस्या को 'मौनी' क्यों कहते हैं? क्योंकि इस दिन जुबान से ज्यादा, मन की बात सुनी जाती है। कहते हैं कि अगर आप इस दिन कुछ देर 'मौन व्रत' (चुप रहने का संकल्प) रखें, तो यह आपके मन को तो शांत करता ही है, साथ ही यह कई यज्ञ करने के बराबर फल देता है। आजकल के शोर-शराबे वाले जीवन में एक दिन की चुप्पी किसी वरदान से कम नहीं है!

इस दिन क्या करना है 'शुभ'?

  1. पवित्र स्नान: अगर गंगा जी जाना मुमकिन हो, तो कहना ही क्या! लेकिन अगर नहीं जा पा रहे, तो घर में नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिला लें। बस, हो गया आपका गंगा स्नान।
  2. पितरों को याद करें: अमावस्या पितरों (पूर्वजों) का दिन होता है। इस दिन उन्हें जल देना और उनके नाम से गरीबों को खाना खिलाना बहुत सुकून देता है।
  3. दान: अपनी क्षमता के अनुसार ऊनी कपड़े, तिल, तेल या अनाज का दान करें। ठंड का समय होता है, किसी जरूरतमंद को कंबल मिल जाए तो उससे बड़ी दुआ क्या होगी?

भूलकर भी न करें ये गलतियां

जैसे कुछ काम करने से पुण्य मिलता है, वैसे ही इस दिन कुछ चीजों से बचना भी चाहिए:

  • देर तक न सोएं: इस पवित्र दिन पर सुबह जल्दी उठना ही सबसे अच्छा है।
  • बहस से बचें: घर में क्लेश या झगड़ा बिल्कुल न करें। वैसे भी यह मौन रहने का दिन है, तो गुस्से को पी जाना ही बेहतर है।
  • खान-पान: इस दिन पूरी तरह सात्विक रहें। तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से कोसों दूर रहें।

तो दोस्तों, तारीख अपनी डायरी में नोट कर लीजिए और मन बना लीजिए। मौनी अमावस्या सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि अपने मन को धोने और नई ऊर्जा भरने का एक शानदार मौका है।