Margashirsha Amavasya 2025 : घर में नहीं टिकता पैसा और हर काम में आती है अड़चन? कहीं आपके पितर आपसे नाराज़ तो नहीं?

Post

News India Live, Digital Desk: क्या आपके घर में भी ऐसा होता है कि आप एक परेशानी से निकलते हैं तो दूसरी दरवाज़े पर खड़ी मिलती है? बहुत मेहनत के बाद भी तरक्की रुकी हुई है और घर में हमेशा लड़ाई-झगड़े का माहौल बना रहता है? अगर इन सवालों का जवाब 'हाँ' है, तो यह पितृ दोष का संकेत हो सकता है।

ज्योतिष में पितृ दोष को एक बड़ा दोष माना गया है। यह तब लगता है जब हमारे पूर्वज यानी पितर हमसे नाराज़ या दुखी होते हैं। उनकी आत्मा की शांति न होने का असर उनकी संतानों के जीवन पर पड़ता है, जिससे ज़िंदगी में उथल-पुथल मची रहती है। लेकिन घबराने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि मार्गशीर्ष महीने में आने वाली अमावस्या का दिन पितरों को खुश करने और इस दोष से मुक्ति पाने के लिए बहुत ही खास माना जाता है।

इन लक्षणों से पहचानें कि पितृ दोष है या नहीं

अगर आपके जीवन में ये परेशानियां बार-बार आ रही हैं, तो आपको थोड़ा सावधान होने की ज़रूरत है:

  • कलह और अशांति: परिवार के सदस्यों में छोटी-छोटी बातों पर मनमुटाव और झगड़ा होना।
  • संतान सुख में बाधा: संतान होने में दिक्कत आना, या संतान का हमेशा बीमार रहना।
  • काम में रुकावट: अच्छी भली नौकरी या चलते हुए व्यापार में अचानक से सब कुछ खराब होने लगना।
  • शादी-ब्याह में देरी: विवाह के लिए सही रिश्ता न मिलना या बात पक्की होकर भी टूट जाना।
  • स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें: घर के किसी न किसी सदस्य का लगातार बीमार रहना और दवाइयों का असर न होना।
  • आर्थिक तंगी: लाखों कमाने के बाद भी घर में पैसे का न टिकना और हमेशा कर्ज बना रहना।
  • घर में तुलसी का सूखना: अगर देखभाल के बाद भी घर में लगी तुलसी बार-बार सूख जाती है, तो यह एक अशुभ संकेत है।

आखिर क्यों लगता है पितृ दोष?

पितृ दोष लगने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि परिवार में किसी का देहांत होने पर उसका विधि-विधान से अंतिम संस्कार और श्राद्ध न करना, जीवित रहते हुए अपने माता-पिता या बड़े-बुजुर्गों का अपमान करना या पीपल जैसे पूजनीय पेड़ को काटना।

मार्गशीर्ष अमावस्या पर करें ये सरल उपाय

पितरों की शांति और पितृ दोष से मुक्ति के लिए मार्गशीर्ष अमावस्या का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। इस साल यह अमावस्या गुरुवार, 20 नवंबर 2025 को पड़ रही है। इस दिन आप पूरी श्रद्धा से ये उपाय कर सकते हैं:

  1. पितरों के नाम से तर्पण: सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर ऐसा संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिला लें। इसके बाद एक लोटे में जल, काले तिल और सफेद फूल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके अपने पितरों का ध्यान करते हुए जल अर्पित करें।
  2. पीपल के पेड़ की पूजा: इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना बहुत फलदायी माना जाता है। दोपहर में पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं और शाम के समय पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक ज़रूर जलाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से पितरों को शांति मिलती है।
  3. जरूरतमंदों को भोजन और दान: अपनी क्षमता के अनुसार किसी ब्राह्मण या गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं। आप चाहें तो अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल या धन का दान भी कर सकते हैं। कहते हैं कि अमावस्या पर किया गया दान सीधा पितरों तक पहुंचता है।
  4. शाम को जलाएं दीपक: शाम के समय अपने घर की दक्षिण दिशा में, जहां आप पितरों की तस्वीर रखते हैं, वहां सरसों के तेल का दीपक जलाएं। अपने पूर्वजों से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगें और परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें।

इन उपायों को सच्चे मन से करने पर पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।