ममता बनर्जी का लीगल अवतार चुनाव आयोग के खिलाफ खुद लड़ेंगी केस, कोर्ट रूम में जब वकील की तरह दलीलें देने लगीं दीदी

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News India Live, Digital Desk  : पश्चिम बंगाल की राजनीति में अक्सर विरोधियों को पटखनी देने वाली ममता बनर्जी अब कानून के मैदान में भी दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट में एक बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी याचिका पर खुद ही बहस करने का फैसला किया। चुनाव आयोग (Election Commission) के खिलाफ एक पुराने मामले में उन्होंने किसी पेशेवर वकील के बजाय खुद पैरवी कर सबको हैरान कर दिया।

क्या है पूरा मामला? क्यों वकील बनीं ममता बनर्जी?

यह मामला 2021 के विधानसभा चुनावों से जुड़ा है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और नंदीग्राम सीट के चुनावी नतीजों को लेकर कानूनी चुनौती दी थी। लंबे समय से चल रही इस कानूनी लड़ाई में अब एक नया मोड़ आ गया है। ममता बनर्जी ने कोर्ट से अनुमति मांगी कि वह अपनी बात खुद रखना चाहती हैं, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

कोर्ट रूम में 'दीदी' की दलीलें और कानूनी बारीकियां

सफेद साड़ी और हवाई चप्पल में जब ममता बनर्जी ने जज के सामने अपनी दलीलें पेश कीं, तो पूरा कोर्ट रूम सन्न रह गया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में निष्पक्षता सबसे जरूरी है। एक वकील की तरह उन्होंने कानूनी धाराओं और चुनाव आचार संहिता की बारीकियों का जिक्र किया।"मैं यहाँ सिर्फ एक मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक नागरिक के तौर पर खड़ी हूँ जिसके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ है।" - ममता बनर्जी

अदालत ने क्या कहा?

कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी की दलीलों को ध्यान से सुना। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनेता ने अपना केस खुद लड़ा हो, लेकिन एक मौजूदा मुख्यमंत्री का इस तरह कोर्ट में जिरह करना काफी चर्चा बटोर रहा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है, लेकिन ममता के इस 'लीगल मूव' ने विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है।

सियासी गलियारों में चर्चा: यह महज केस है या 2026 की तैयारी?

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह कदम जनता को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश है। वह यह दिखाना चाहती हैं कि वह अपने हक और बंगाल की जनता के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। चुनाव आयोग के खिलाफ इस लड़ाई को वह 'लोकतंत्र की रक्षा' के तौर पर पेश कर रही हैं।