Mamata Banerjee as Lawyer: सुप्रीम कोर्ट में 'वकील' ममता बनर्जी राजनीति में आने से पहले ही थाम लिया था काला कोट

Post

News India Live, Digital Desk : ममता बनर्जी ने कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से एलएलबी (LLB) की डिग्री हासिल की थी। वह कलकत्ता हाईकोर्ट में एक वकील के रूप में पंजीकृत (Registered) भी रही हैं।

ममता बनर्जी का कानूनी और राजनीतिक टाइमलाइन (The Timeline):

1980 का दशक (शुरुआत): राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले ममता बनर्जी ने एक वकील के रूप में अभ्यास करना शुरू किया था। वह अक्सर गरीब और वंचित लोगों के कानूनी मामलों को मुफ्त में देखने के लिए जानी जाती थीं।

1991: कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत के दौरान ही उन्होंने अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की। हालाँकि, केंद्र में मंत्री बनने के बाद उनका सक्रिय कानूनी अभ्यास कम हो गया।

2021 (नंदीग्राम चुनावी याचिका): नंदीग्राम चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए ममता बनर्जी ने खुद कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने वर्चुअली अदालती कार्यवाही में हिस्सा लिया और अपनी दलीलों को प्रभावित करने वाले बिंदुओं पर कानूनी सलाह दी।

2024 (सेंसरशिप और मानहानि मामले): ममता बनर्जी अक्सर खुद से जुड़े कानूनी मामलों (जैसे राज्यपाल के साथ विवाद या मानहानि के मुकदमे) में अपनी कानूनी टीम के साथ सीधे ड्राफ्टिंग में शामिल रही हैं।

2026 (सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की तैयारी): ताज़ा खबरों के अनुसार, ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के किसी महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे या राज्य के अधिकारों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में खुद बहस करने (Appearing in Person) की योजना बना रही हैं।

क्यों पहन रही हैं फिर से वकील का चोगा?

कानूनी जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी का खुद अदालत में पेश होना एक बड़ा राजनीतिक संदेश है।

संविधान की रक्षा: वह दिखाना चाहती हैं कि वह केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि संविधान की ज्ञाता भी हैं।

सीधा संवाद: 'इन-पर्सन' पेश होकर वह अपनी बात को बिना किसी फिल्टर के शीर्ष अदालत के सामने रखना चाहती हैं।

विपक्ष का रुख

विपक्षी दलों (भाजपा और सीपीआई-एम) ने इसे एक "पब्लिसिटी स्टंट" करार दिया है। उनका तर्क है कि जब राज्य में कानून व्यवस्था के कई मामले लंबित हैं, तो मुख्यमंत्री का वकील बनना केवल ध्यान भटकाने की कोशिश है।