महाराष्ट्र का महा-मुकाबला ,29 नगर निगमों में महायुति का दबदबा? जानिये क्या कहती है ज़मीनी हकीकत

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News India Live, Digital Desk : महाराष्ट्र की राजनीति इस समय किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं लग रही है। विधानसभा चुनावों के बाद अब सबकी निगाहें राज्य के 29 नगर निगमों (Municipal Corporations) के चुनावों पर टिकी हैं। यह कोई आम चुनाव नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि महाराष्ट्र के बड़े शहरों की कमान किसके हाथ में रहेगी।

हालिया रिपोर्ट्स और रुझान बता रहे हैं कि बीजेपी की अगुवाई वाली 'महायुति' (बीजेपी + एकनाथ शिंदे + अजीत पवार) काफी मजबूत स्थिति में नज़र आ रही है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्यों? आखिर क्यों महाविकास अघाड़ी (MVA) को इन नगर निगमों में मज़बूत टक्कर मिल रही है? आइए, बिना किसी भारी-भरकम शब्द के, इसे एक चर्चा की तरह समझते हैं।

1. योजनाओं का जमीनी असर
मानो या न मानो, सरकार की योजनाओं ने एक बहुत बड़ा वोट बैंक तैयार कर लिया है। 'माझी लाड़की बहिन योजना' ने जिस तरह से महिलाओं को सीधे लाभ पहुँचाया है, उसका असर अब शहर के घरों में साफ़ दिख रहा है। मध्यम वर्ग और निम्न आय वाले इलाकों में महायुति का ये 'कार्ड' मास्टरस्ट्रोक साबित होता दिख रहा है।

2. ट्रिपल इंजन सरकार का संसाधन बल
जब सत्ता और संसाधन हाथ में हों, तो चुनाव लड़ने की ताकत बढ़ जाती है। शहरों में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, चाहे वो मुंबई की मेट्रो हो या पुणे और नागपुर के विकास कार्य—महायुति इनका क्रेडिट खुलकर ले रही है। लोग चाहते हैं कि वही पार्टी नगर निगम में हो, जो राज्य में सत्ता में है ताकि बजट और फंड्स में कोई अड़ंगा न लगे।

3. मज़बूत संगठन और बूथ मैनेजमेंट
बीजेपी का संगठन हमेशा से ही नगर निगम चुनावों में काफी बारीकी से काम करता है। अब जब उनके साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की एनसीपी भी हैं, तो शहरी इलाकों में बूथ मैनेजमेंट काफी आक्रामक हो गया है। कार्यकर्ता घर-घर पहुँच रहे हैं और लोकल स्तर पर नाराजगी दूर करने में जुटे हैं।

4. लोकल लीडर्स का पावर-बेस
29 नगर निगमों के पास अपनी स्थानीय पहचान है। पुणे, ठाणे, नासिक और नवी मुंबई जैसे शहरों में अजीत पवार और शिंदे की व्यक्तिगत पकड़ है। अजीत पवार जहाँ शहरी एडमिनिस्ट्रेशन के मास्टर माने जाते हैं, वहीं शिंदे साहब अपनी छवि एक 'जमीन से जुड़े' नेता के रूप में बनाए हुए हैं। यह जुगलबंदी स्थानीय निकाय चुनावों में विरोधियों पर भारी पड़ती दिख रही है।

विपक्ष (MVA) के लिए क्या है चुनौती?
महाविकास अघाड़ी (उद्धव ठाकरे + शरद पवार + कांग्रेस) के सामने सबसे बड़ी समस्या है 'सीटों का बंटवारा' और आपसी तालमेल। शहरी इलाकों में जब तक ये तीनों पार्टियां एकजुट होकर एक ही आवाज़ में नहीं बोलेंगी, महायुति को पटखनी देना मुश्किल होगा। खासकर बीजेपी का कट्टर वोटर शहरी इलाकों में फिलहाल कहीं शिफ्ट होता नहीं दिख रहा है।