महादेव भी शनि की वक्र दृष्टि से डरते थे? जानिये वह कहानी जब भगवान शिव को भी हाथी बनकर छुपना पड़ा
News India Live, Digital Desk: शनि देव को भगवान शिव का ही शिष्य माना जाता है। शिव ने ही शनि को कर्मों के हिसाब से दंड देने और फल देने की शक्ति प्रदान की थी। लेकिन एक दिन खुद शिष्य ने अपने गुरु यानी महादेव से कुछ ऐसा कह दिया जिससे वह भी हैरत में पड़ गए।
महादेव को शनि देव की चेतावनी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार शनि देव कैलाश पर्वत पहुंचे। उन्होंने बड़े सम्मान के साथ महादेव को प्रणाम किया और फिर एक बड़ी बात कही। शनि देव बोले "प्रभु, आपकी महानता अपनी जगह है, लेकिन न्याय का पहिया किसी के लिए नहीं रुकता। कल आप पर मेरी 'वक्र दृष्टि' पड़ने वाली है और आप पर साढ़े साती का प्रभाव शुरू होगा।"
महादेव तो आमोद-प्रमोद में रहने वाले भोला भंडारी हैं। उन्होंने हँसकर शनि देव से पूछा कि तुम्हारी ये नज़र मुझ पर कितने समय तक रहेगी? शनि देव ने जवाब दिया "सवा प्रहर (यानी लगभग पौने चार घंटे) तक आपको इसका प्रभाव झेलना होगा।"
शिव जी की 'लुका-छिपी' की कोशिश
भोलेनाथ ने सोचा कि आखिर वो शिव हैं, भला एक छोटा सा ग्रह उन पर क्या प्रभाव डालेगा। लेकिन खेल ही खेल में उन्होंने खुद को शनि देव से बचाने का विचार किया। महादेव अगले दिन धरती पर आ गए और अपनी लीला रचते हुए एक हाथी (मतंग) का रूप धर लिया और घने जंगलों में छिप गए।
उन्हें लगा कि हाथी बनकर वह खुद को सामान्य पशु के वेश में छुपा लेंगे और साढ़े साती का समय गुजर जाएगा। लगभग सवा प्रहर तक वह हाथी बनकर जंगल में यहाँ-वहाँ घूमते रहे। जैसे ही समय समाप्त हुआ, महादेव वापस अपने दिव्य रूप में आए और कैलाश पहुंचे।
शनि देव की जीत और महादेव का मान
कैलाश पहुँचते ही महादेव का सामना मुस्कुराते हुए शनि देव से हुआ। शिव जी ने ठहाका लगाया और कहा— "देख लिया शनि, तुमने मुझे परेशान करने का सोचा था, लेकिन मैं तो जंगल में मज़े से हाथी बनकर समय बिता आया। तुम्हारी साढ़े साती मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकी।"
तभी शनि देव ने बड़ी शालीनता से जवाब दिया— "प्रभु, मेरी साढ़े साती तो सफल रही। भले ही आप जगत के स्वामी हैं, लेकिन आपको साढ़े साती के कारण ही भगवान से एक जंगली जानवर यानी 'हाथी' बनना पड़ा। ये साढ़े साती का ही तो फल था कि त्रिभुवन का स्वामी चार घंटे तक हाथी बनकर भटकता रहा।"
शिव जी मुस्कुरा दिए। वह जान गए कि शनि देव के न्याय के विधान से कोई नहीं बच सकता, चाहे वह कोई साधारण व्यक्ति हो या फिर साक्षात महादेव।