Maa Shakambhari Story : क्यों देवी को अपने शरीर से उगाने पड़े फल और सब्जियां? पढ़िए ये अनोखी कथा
News India Live, Digital Desk : हमारे पुराणों में हर देवी-देवता के अवतार लेने के पीछे कोई न कोई बड़ा कारण या मकसद छिपा होता है। माँ शाकुम्भरी का अवतार तब हुआ जब पृथ्वी पर हाहाकार मचा हुआ था। यह कहानी सिर्फ भक्ति की नहीं, बल्कि पर्यावरण (Environment) और अन्न-जल की कीमत समझने की भी है।
वो 100 साल का भयानक सूखा (Famine)
पुराणों के अनुसार, प्राचीन काल में 'दुर्गम' (Durgamasur) नाम का एक बेहद क्रूर राक्षस हुआ करता था। उसने अपनी तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके वेदों को अपने कब्जे में ले लिया था। वेदों के गायब होते ही ऋषियों ने पूजा-पाठ और यज्ञ बंद कर दिए। नतीजा यह हुआ कि देवताओं की शक्ति कम होने लगी।
इसका असर पृथ्वी पर बहुत भयानक पड़ा। कहा जाता है कि लगातार 100 सालों तक धरती पर बारिश ही नहीं हुई। नदियां सूख गईं, खेत बंजर हो गए, जानवर और इंसान भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर मरने लगे। ऐसा लग रहा था कि अब सृष्टि खत्म हो जाएगी।
जब माँ की आंखों से बही नदियों की धारा
इस मुसीबत से बचने के लिए हिमालय की गुफाओं (शिवालिक पर्वतमाला) में बचे हुए ऋषियों ने माँ भगवती की घोर उपासना की। भक्तों का दुख देखकर माँ पार्वती का दिल पसीज गया और उन्होंने एक अद्भुत रूप में अवतार लिया।
कहते हैं, जब देवी ने धरती की यह हालत देखी, तो उनकी आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली। वे लगातार 9 दिन और रात तक रोती रहीं। उनके आंसुओं के प्रवाह से ही सूखी नदियां फिर से लबालब भर गईं और प्यास से तड़प रही दुनिया को पानी मिला। चूँकि उनकी हज़ारों आंखें थीं जो सब देख रही थीं, इसलिए उन्हें 'शताक्षी' (Shatakshi) यानी 'सौ आंखों वाली देवी' भी कहा गया।
क्यों पड़ा नाम 'शाकुम्भरी'?
सिर्फ पानी से बात नहीं बनने वाली थी, लोगों को भूख भी लगी थी। तब देवी ने अपने दिव्य शरीर से अनंत मात्रा में शाक (सब्जियां), फल, कंद-मूल और औषधियां प्रकट कीं। उन्होंने अपने शरीर के अंगों से ही पूरी दुनिया का पेट भरा और पोषण दिया।
संस्कृत में 'शाक' का अर्थ होता है सब्जियां/वनस्पति और 'अम्भरी' का अर्थ होता है पालन करने वाली या धारण करने वाली। क्योंकि उन्होंने वनस्पतियों से सबका भरण-पोषण किया, इसलिए वे 'शाकुम्भरी' कहलाईं।
बुराई का अंत और हरियाली की वापसी
जब राक्षस दुर्गम को यह पता चला, तो उसने देवी पर हमला कर दिया। माँ शाकुम्भरी ने एक भीषण युद्ध में उस राक्षस का अंत कर दिया और वेदों को मुक्त कराया। दुर्गम को मारने के कारण ही उन्हें 'दुर्गा' भी कहा जाता है।