लखनऊ का चक्कर अब खत्म! पूरब से पश्चिम को जोड़ने वाली नई सड़क को मिली हरी झंडी

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अगर आप भी आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से आकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर जाने के लिए लखनऊ शहर के ट्रैफिक में घंटों फंसते हैं, तो आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। योगी सरकार ने एक ऐसे नए एक्सप्रेसवे को मंजूरी दे दी है, जो इन दोनों बड़ी सड़कों को शहर के बाहर-बाहर ही जोड़ देगा। अब आपका सफर न सिर्फ तेज, बल्कि बिल्कुल मक्खन जैसा हो जाएगा।

इस नए एक्सप्रेसवे को ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे कहा जा रहा है, और यह उत्तर प्रदेश के "एक्सप्रेसवे ग्रिड" विजन को पूरा करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

क्या है यूपी का 'एक्सप्रेसवे ग्रिड' विजन?

कल्पना कीजिए एक ऐसे मकड़जाल की, जिसमें उत्तर प्रदेश का हर कोना शानदार सड़कों से जुड़ा हो। पूरब से पश्चिम जाना हो या उत्तर से दक्षिण, आपको कहीं रुकने या जाम में फंसने की ज़रूरत न पड़े। बस, एक एक्सप्रेसवे से उतरकर दूसरे पर चढ़ जाएं। यही है यूपी का एक्सप्रेसवे ग्रिड विजन, जिसमें ये सड़कें शामिल हैं:

  • पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
  • गंगा एक्सप्रेसवे (जो बन रहा है)
  • बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
  • गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे

और अब इन सबको जोड़ने के लिए यह नया लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है।

कितना लंबा, कितना खर्चा?

यह नई सड़क लगभग 50 किलोमीटर लंबी होगी, जिसे बनाने में करीब 4,775 करोड़ रुपयेका खर्च आएगा। इसे अभी छह लेन का बनाया जाएगा, लेकिन भविष्य में ज़रूरत पड़ने पर इसे आठ लेन तक चौड़ा किया जा सकेगा। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इसका पूरा खर्चा राज्य सरकार उठाएगी।

आम आदमी को क्या मिलेंगे फायदे?

  1. जाम से मुक्ति: लखनऊ-कानपुर और लखनऊ-प्रयागराज हाईवे भी इस नई सड़क से जुड़ जाएंगे, जिससे इन रास्तों पर भी ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
  2. व्यापार को रफ्तार: किसानों का सामान हो या फैक्ट्रियों का माल, अब बिना रुके और तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुँच सकेगा।
  3. विकास की नई राह: जब सड़कें अच्छी होती हैं, तो उस इलाके में नई-नई कंपनियाँ आती हैं, होटल और ढाबे खुलते हैं, जिससे हज़ारों लोगों को काम मिलता है।

यह सिर्फ एक सड़क नहीं है, बल्कि यह तरक्की का वह नया रास्ता है जो उत्तर प्रदेश को देश का सबसे आधुनिक सड़क नेटवर्क वाला राज्य बनाने जा रहा है।