Lok Sabha Revokes : 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द; निशिकांत दुबे ने बताया किन 2 शर्तों पर बनी सहमति
News India Live, Digital Desk : बजट सत्र के पहले हिस्से में 'अशोभनीय व्यवहार' के कारण निलंबित किए गए 7 कांग्रेस और 1 सीपीआई (एम) सांसद आज सदन में वापस लौट आए हैं। निशिकांत दुबे ने स्पष्ट किया कि यह निलंबन केवल 'खेद प्रकट करने' और भविष्य के लिए 'लक्ष्मण रेखा' तय करने के आधार पर वापस लिया गया है।
निशिकांत दुबे द्वारा बताए गए 2 मुख्य बिंदु (Points of Agreement):
सदन की गरिमा और 'वेल' में न आना: निशिकांत दुबे ने जोर देकर कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहली सहमति यह बनी है कि कोई भी सदस्य विरोध प्रदर्शन के दौरान सदन के 'वेल' (बीच का घेरा) में नहीं आएगा। साथ ही, वे स्पीकर की कुर्सी (पोडियम) की ओर कागज नहीं फेंकेंगे और न ही महासचिव की डेस्क पर विरोध करेंगे।
प्लेकार्ड और AI-जेनरेटेड तस्वीरों पर प्रतिबंध: दुबे ने बताया कि सदन के भीतर तख्तियां (Placards), पोस्टर और AI द्वारा बनाई गई भ्रामक तस्वीरों का प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इस बात पर सहमति जताई है कि वे अपनी बात रखने के लिए संसदीय चर्चा का सहारा लेंगे, न कि शोर-शराबे और दृश्य-बाधाओं का।
निलंबन वापसी की प्रक्रिया
खेद प्रकट करना: कांग्रेस के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के. सुरेश ने सदन में सदस्यों द्वारा किए गए 'अनजाने व्यवहार' के लिए खेद प्रकट किया।
प्रस्ताव: इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने निलंबन वापस लेने का प्रस्ताव रखा, जिसे ध्वनि मत (Voice Vote) से पारित कर दिया गया।
निशिकांत दुबे का रुख: हालांकि दुबे ने पहले इन सांसदों के व्यवहार को 'गुंडागर्दी' करार दिया था, लेकिन सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति के बाद उन्होंने सदन की सुचारू कार्यवाही के लिए इस कदम का समर्थन किया।
वापस आने वाले प्रमुख सांसद:
इनमें कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सीपीआई (एम) के एस. वेंकटेशन शामिल हैं।