Jharkhand Farmers : 9 जिलों के 1.59 लाख किसानों को नहीं मिला MSP, 8 महीने से 4 साल तक का इंतजार
News India Live, Digital Desk: झारखंड राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम (JSFCL) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, हजारों किसानों को उनके फसल की सही कीमत समय पर नहीं मिल पाई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।
1. भुगतान में भारी देरी के आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित हजारीबाग के 61,218 किसान हैं। नियम के मुताबिक, 50% भुगतान खरीद के अगले दिन और बाकी 50% एक महीने के भीतर होना चाहिए था, लेकिन हकीकत इसके उलट है:
पहली किस्त: 79% से 98% किसानों को पहली किस्त पाने में 775 दिनों तक की देरी हुई।
दूसरी किस्त: 64% से 100% किसानों को दूसरी किस्त के लिए 370 दिनों (एक साल) से अधिक इंतजार करना पड़ा।
लंबित भुगतान: 1741 किसानों को 8.84 करोड़ रुपये का भुगतान अभी भी बकाया है, जबकि खरीद हुए 8 महीने से लेकर 4 साल तक बीत चुके हैं।
2. बिचौलियों का बढ़ता जाल
सरकार ने इस साल (2025-26) के लिए धान का भाव 2,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया है, लेकिन भुगतान में देरी का फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं:
किसान मजबूरी में अपना धान 1,600 रुपये प्रति क्विंटल के कम दाम पर बिचौलियों को बेच रहे हैं।
विपक्षी नेताओं (जैसे बाबूलाल मरांडी) का आरोप है कि सरकार की सुस्त खरीद नीति बिचौलियों को बढ़ावा दे रही है।
3. प्रशासनिक लापरवाही के कारण
JSFCL की आंतरिक जांच और ऑडिट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं:
बोर्ड मीटिंग का अभाव: 2019 से 2023 के बीच अनिवार्य 16 बोर्ड बैठकों की जगह केवल 6 बैठकें हुईं।
लंबित वार्षिक खाते: कंपनी के वार्षिक खाते साल 2010 से ही पेंडिंग हैं, जिसके लिए कर्मचारियों की कमी का बहाना बनाया जा रहा है।
कोई कार्रवाई नहीं: इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
4. वर्तमान स्थिति (मार्च 2026)
सरकार ने इस साल 6 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है, लेकिन अब तक केवल 50% (3 लाख MT) की ही खरीद हो पाई है।
धान खरीद की अंतिम तिथि 31 मार्च है, जिसे बढ़ाकर अप्रैल तक किए जाने की संभावना है।