मलबे में तब्दील हुई ज़िंदगियां? जानें क्यों जमशेदपुर प्रशासन ने एक साथ 24 मकानों पर चलाया पीला पंजा

Post

News India Live, Digital Desk: घर बनाना हर इंसान का सबसे बड़ा सपना होता है। लोग पाई-पाई जोड़कर एक छत खड़ी करते हैं, लेकिन जब वही छत प्रशासन के एक आदेश पर ज़मींदोज कर दी जाए, तो उसकी टीस बरसों तक रहती है। कुछ ऐसा ही नज़ारा आज जमशेदपुर अक्षेस (JNAC) के अंतर्गत आने वाले इलाकों में देखने को मिला। रफ़्तार से आती पीली मशीनों यानी बुलडोज़र ने एक-दो नहीं, बल्कि 24 अवैध मकानों को ढहा दिया।

आखिर ये नौबत क्यों आई?
जमशेदपुर में अक्सर अतिक्रमण और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन चेतावनी देता रहा है। लेकिन आज की कार्रवाई किसी छोटे-मोटे झोपड़े पर नहीं, बल्कि पक्के और ऊंचे ढांचों पर हुई। जेएनएसी का कहना है कि ये निर्माण बिना किसी नक़्शे और मंजूरी के किए गए थे। काफी समय से इन्हें नोटिस दिया जा रहा था, लेकिन जब कार्रवाई शुरू हुई, तो पूरा इलाका अफरा-तफरी का गवाह बन गया।

सड़क पर उतरे लोग, भारी विरोध का माहौल
बुलडोज़र देखते ही घरों में रह रहे लोगों की चीख-पुकार निकल गई। किसी ने रोते हुए दुहाई दी, तो किसी ने अपनी पूरी जमा-पूँजी का हवाला दिया। पुलिस की भारी मौजूदगी के कारण विरोध तो ज़्यादा सफल नहीं हो पाया, लेकिन लोगों का गुस्सा साफ देखा जा सकता था। उनका सवाल यही था कि जब ये मकान बन रहे थे, तब प्रशासन कहाँ सोया हुआ था?

नियम बनाम जज़्बात
एक तरफ प्रशासन का अपना तर्क है कि शहर को नियम और नक़्शे के हिसाब से ही बसना चाहिए। अवैध बस्तियां और अनप्लांड निर्माण भविष्य के लिए मुसीबत बनते हैं। दूसरी तरफ, उन लोगों की मजबूरी है जिन्होंने बिना कागजों की समझ के अपना घर बना लिया। आज के मलबे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि अवैध कब्जे पर आखिर लगाम लगेगी कब?

जेएनएसी ने साफ़ कर दिया है कि ये कार्रवाई थमेगी नहीं। जमशेदपुर के अलग-अलग इलाकों में अभी और भी ऐसी इमारतों को चिन्हित किया गया है। अगर आप भी किसी ऐसे निर्माण के बारे में सोच रहे हैं या कर चुके हैं, तो कागजी जांच-परख को मज़ाक में मत लीजिये, वरना जमशेदपुर की सड़कों पर चलता यह बुलडोज़र कल आपके दरवाजे पर भी खड़ा हो सकता है।