Legal Relief : मजीठिया को सुप्रीम राहत आय से अधिक संपत्ति मामले में मिली जमानत
News India Live, Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश सुनाया। मजीठिया पिछले 7 महीनों से पटियाला की नाभा जेल में बंद थे। उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights of SC Order)
अदालत ने मजीठिया को जमानत देते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर गौर किया:
लंबी हिरासत: कोर्ट ने नोट किया कि मजीठिया पिछले सात महीनों (जून 2025 से) से जेल में हैं और जांच के लिए उनकी हिरासत अब आवश्यक नहीं है।
NDPS मामले का संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि मजीठिया को 2021 के ड्रग्स मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है, और मौजूदा भ्रष्टाचार का मामला उसी पुरानी जांच से उपजा है।
जांच में सहयोग: बेंच ने कहा कि क्योंकि चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, इसलिए आरोपी को अनिश्चित काल के लिए जेल में रखना उचित नहीं है।
क्या है पूरा मामला? (The Disproportionate Assets Case)
मजीठिया के खिलाफ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने जून 2025 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया था:
संपत्ति का आरोप: विजिलेंस का आरोप है कि मजीठिया और उनके परिवार ने 2007 से 2017 के बीच (अकाली-भाजपा सरकार के दौरान) अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से ₹540 करोड़ से अधिक की संपत्ति बनाई।
चार्जशीट: अगस्त 2025 में विजिलेंस ने इस मामले में करीब 40,000 पन्नों की विशाल चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें 200 से अधिक गवाहों के नाम शामिल हैं।
जान का खतरा: सुनवाई के दौरान मजीठिया के वकीलों ने जेल के भीतर उनकी जान को खतरा होने की बात भी कही थी, जिसका कोर्ट ने संज्ञान लिया।
राजनीतिक हलचल: राहत या सिर्फ कानूनी प्रक्रिया?
मजीठिया की जमानत के बाद पंजाब की राजनीति में बयानों का दौर शुरू हो गया है:
अकाली दल: पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे 'सत्य की जीत' बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ न्याय की जीत करार दिया।
सरकार का पक्ष: पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलना बरी होना (Acquittal) नहीं है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल अभी जारी रहेगा और सरकार के पास पुख्ता सबूत हैं।