किरोड़ी लाल मीणा का रुद्र अवतार सवाई माधोपुर में XEN और AEN को सरेआम फटकारा
News India Live, Digital Desk: राजस्थान के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। मंगलवार को सवाई माधोपुर के ग्रामीण इलाकों के दौरे के दौरान जब उन्होंने टूटी सड़कें और आधे-अधूरे नाले देखे, तो उनका पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही संबंधित विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) और सहायक अभियंता (AEN) को तलब किया और उनकी कार्यप्रणाली पर जमकर फटकार लगाई।
1. "ये विकास है या मजाक?" - मंत्री का अधिकारियों से सवाल
ग्रामीणों ने मंत्री से शिकायत की थी कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है और इंजीनियरों ने निरीक्षण तक नहीं किया।
मौके पर जांच: किरोड़ी लाल मीणा ने खुद सड़क की गुणवत्ता को जांचा और अधिकारियों से पूछा कि "ऐसी घटिया सड़क को पास कैसे किया गया?"
अधिकारियों की चुप्पी: मंत्री के कड़े सवालों के सामने XEN और AEN बगलें झांकते नजर आए, जिस पर मीणा और भी भड़क गए।
2. भ्रष्ट तंत्र को दी सीधी चेतावनी
मीणा ने अधिकारियों को दो-टूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भ्रष्टाचार पर वार: उन्होंने कहा, "अगर मुझे एक भी शिकायत मिली कि ठेकेदार और इंजीनियर की मिलीभगत से काम खराब हुआ है, तो केवल सस्पेंशन नहीं, रिकवरी और एफआईआर भी होगी।"
समय सीमा तय: उन्होंने लंबित कार्यों को अगले 15 दिनों के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
3. 'बाबा' के तेवर से प्रशासन में हड़कंप
किरोड़ी लाल मीणा, जिन्हें उनके समर्थक प्यार से 'बाबा' कहते हैं, उनकी इस सक्रियता से सवाई माधोपुर प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
जनसुनवाई: दौरे के दौरान उन्होंने दर्जनों गांवों में जनसुनवाई की और पानी-बिजली की समस्याओं को लेकर मौके पर ही अधिकारियों को फोन कर समाधान करने को कहा।
राजनीतिक संदेश: जानकारों का मानना है कि मीणा इस तरह के एक्शन से प्रशासन को यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार की योजनाएं कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए।
अधिकारियों को मंत्री की 3 सख्त नसीहतें
फील्ड में उतरें: दफ्तर में बैठकर फाइलें निपटाने के बजाय इंजीनियरों को खुद साइट पर जाकर जांच करनी होगी।
ठेकेदारों पर नकेल: घटिया काम करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) किया जाए।
जनता की सुनें: आम आदमी की शिकायतों को अनसुना करना भारी पड़ेगा।