Kharmas 2026 : आखिर क्यों एक महीने के लिए थम जाते हैं शुभ कार्य? जानिए सूर्य देव के सात घोड़ों और गधे से जुड़ी रोचक कथा
News India Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस काल को खरमास (Kharmas) या 'धनुर्मास' कहा जाता है। 14 मार्च 2026 से सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास की शुरुआत हो रही है, जो एक महीने तक चलेगा। इस दौरान शादी-विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाती है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसे 'खरमास' क्यों कहते हैं और इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या है? आइए जानते हैं सूर्य देव के रथ और घोड़ों से जुड़ी वह अद्भुत कहानी।
पौराणिक कथा: जब थक गए थे सूर्य देव के घोड़े
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव ब्रह्मांड की परिक्रमा करने के लिए अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर निरंतर चलते रहते हैं। उनके लिए रुकना वर्जित है, क्योंकि उनके रुकते ही सृष्टि का चक्र ठहर जाएगा।
थकान और प्यास: निरंतर चलते-चलते एक समय सूर्य देव के घोड़े बुरी तरह थक गए और उन्हें प्यास सताने लगी। घोड़ों की दयनीय हालत देख सूर्य देव का हृदय पसीज गया। वे उन्हें आराम देना चाहते थे, लेकिन नियम के अनुसार वे रथ रोक नहीं सकते थे।
तालाब के किनारे गधों का मिलना: चलते-चलते उन्हें एक तालाब दिखाई दिया, जहां दो 'खर' (गधे) मौजूद थे। सूर्य देव ने अपने घोड़ों को पानी पीने और विश्राम करने के लिए तालाब पर छोड़ दिया और रथ की गति बनाए रखने के लिए उसमें उन दो गधों को जोत दिया।
घोड़ों की जगह 'खर': गधे, घोड़ों की तुलना में बहुत धीमी गति से चलते हैं। इसके कारण रथ की गति काफी कम हो गई और सूर्य का तेज भी कुछ फीका पड़ गया।
एक महीने का चक्र: सूर्य देव ने पूरे एक महीने तक उन गधों के सहारे रथ खींचा। इस दौरान घोड़ों ने अपनी थकान मिटाई और ऊर्जा वापस पाई। एक महीने बाद जब घोड़े विश्राम कर चुके थे, तब सूर्य देव ने वापस उन्हें रथ में जोड़ा और वे अपनी पुरानी तीव्र गति से चलने लगे।
इसलिए इसे कहा गया 'खरमास'
चूंकि एक महीने तक सूर्य के रथ को 'खर' (गधों) ने खींचा था, इसलिए इस अवधि को खरमास कहा जाने लगा। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, इस समय सूर्य का प्रभाव कम हो जाता है, जिसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता।
खरमास का महत्व: भक्ति और साधना का समय
भले ही इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित हों, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह महीना बहुत महत्वपूर्ण है:
दान-पुण्य: खरमास में किए गए दान का फल अनंत गुना मिलता है।
विष्णु साधना: इस महीने को 'पुरुषोत्तम मास' के समान माना जाता है, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है।
सूर्य उपासना: उगते सूर्य को अर्घ्य देने से कुंडली के दोष शांत होते हैं और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
कब खत्म होगा खरमास?
साल 2026 में 14 मार्च से शुरू हुआ यह खरमास 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ समाप्त होगा। इसके बाद ही फिर से शहनाइयां गूंजेंगी और शुभ कार्यों की शुरुआत होगी।