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March 18 2026 08:31 pm

Chaitra Amavasya 2026 : पितृ दोष से मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए कब करें स्नान-दान? जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

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News India Live, Digital Desk: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को चैत्र अमावस्या (Chaitra Amavasya) कहा जाता है। यह अमावस्या धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके अगले दिन से ही हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) और चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। पितरों की शांति, तर्पण और कालसर्प दोष निवारण के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना गया है।

साल 2026 में अमावस्या की तिथि को लेकर क्या है पंचांग की गणना, आइए विस्तार से समझते हैं।

चैत्र अमावस्या 2026: तिथि और समय

पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की गणना इस प्रकार है:

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 17 मार्च 2026, मंगलवार रात 11:00 बजे से।

अमावस्या तिथि समाप्त: 18 मार्च 2026, बुधवार रात 08:34 बजे तक।

निष्कर्ष: उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, स्नान, दान और तर्पण के लिए 18 मार्च 2026 (बुधवार) का दिन शास्त्रसम्मत और शुभ रहेगा।

स्नान-दान और पूजा के शुभ मुहूर्त

18 मार्च को पवित्र नदियों में स्नान और दान के लिए निम्नलिखित समय श्रेष्ठ हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:52 से 05:40 तक (पवित्र स्नान के लिए सर्वोत्तम)।

अभिजीत मुहूर्त: इस दिन बुधवार होने के कारण दोपहर 12:05 से 12:53 तक रहेगा।

तर्पण/पितृ पूजा समय: सुबह 11:30 से दोपहर 02:30 के बीच का समय पितरों के तर्पण के लिए विशेष फलदायी है।

चैत्र अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व

पितृ दोष से मुक्ति: इस दिन पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना या संगम) में स्नान कर पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करने से सात पीढ़ियों के पितृ प्रसन्न होते हैं।

कालसर्प दोष निवारण: जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष है, उनके लिए इस दिन चांदी के नाग-नागिन के जोड़े का पूजन कर उन्हें जल में प्रवाहित करना अचूक उपाय माना जाता है।

विक्रम संवत का समापन: चैत्र अमावस्या विक्रम संवत 2082 (वर्तमान संवत) का अंतिम दिन होगा, इसके बाद 19 मार्च से संवत 2083 की शुरुआत होगी।

इस दिन क्या करें? (अचूक उपाय)

पीपल पूजा: अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 7 परिक्रमा करें। इससे शनि दोष और पितृ दोष शांत होते हैं।

अन्न दान: इस दिन जरूरतमंदों को सफेद तिल, चावल, दूध या सफेद वस्त्रों का दान करना चाहिए।

दीप दान: शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक दीपक जलाएं, यह पितरों का मार्ग प्रकाशित करता है।