Khamenei's 4 Big Mistakes : क्यों खामेनेई की मौत पर भारत ने साधी चुप्पी? वो 4 भूलें जिन्होंने मोदी सरकार को किया नाराज अब कांग्रेस ने दागे सवाल
News India Live, Digital Desk: ईरान में सत्ता परिवर्तन और खामेनेई युग के अंत के बीच भारत सरकार की 'चुप्पी' पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। सोनिया गांधी ने इसे 'तटस्थता नहीं, बल्कि कर्तव्यहीनता' करार दिया है। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि खामेनेई ने पिछले कुछ वर्षों में भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर अपनी विश्वसनीयता खो दी थी। Zee News ने उन 4 मौकों का जिक्र किया है जब खामेनेई ने भारत की संप्रभुता को चुनौती दी थी।
1. 2017: कश्मीर पर भड़काऊ बयान (The Kashmir Mistake)
खामेनेई ने पहली बड़ी भूल 2017 में की थी, जब उन्होंने ईद के मौके पर कश्मीर को 'उत्पीड़ित मुस्लिम देशों' की सूची में शामिल किया था।
भड़काऊ रुख: उन्होंने मुसलमानों से अपील की थी कि वे कश्मीर में 'अत्याचार' के खिलाफ आवाज उठाएं।
भारत का जवाब: भारत ने इसे अपने आंतरिक मामले में सीधा हस्तक्षेप माना और कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
2. 2019: आर्टिकल 370 पर पाकिस्तान की भाषा (Article 370 Stand)
जब भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आनुच्छेद 370 को खत्म किया, तो खामेनेई ने एक बार फिर पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाया।
निष्पक्ष पॉलिसी की मांग: उन्होंने भारत सरकार से कश्मीर में 'मुसलमानों के प्रति निष्पक्ष नीति' अपनाने की मांग की थी।
कूटनीतिक दूरी: इस बयान के बाद भारत और ईरान के रिश्तों में शीत युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी।
3. 2020: दिल्ली दंगों पर प्रोपेगेंडा (Delhi Riots Tweets)
साल 2020 में दिल्ली में हुए दंगों के दौरान खामेनेई ने सोशल मीडिया पर बेहद विवादित टिप्पणियां की थीं।
हिंदुओं को बताया 'कट्टरपंथी': उन्होंने दिल्ली दंगों को 'मुसलमानों का नरसंहार' करार दिया था और #IndianMuslimsInDanger जैसे हैशटैग का समर्थन किया था।
दूत तलब: भारत के विदेश मंत्रालय ने तब ईरान के राजदूत को तलब कर साफ लहजे में कहा था कि वे भारत के लोकतांत्रिक ढांचे पर टिप्पणी करना बंद करें।
4. CAA पर संसद का विरोध (The CAA Friction)
भारत के 'नागरिकता संशोधन कानून' (CAA) को लेकर भी ईरान की खामेनेई सरकार ने शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाया था।
प्रस्ताव पारित: ईरान की संसद ने इस कानून को 'मुस्लिम विरोधी' बताते हुए इसकी आलोचना की थी।
विश्वास की कमी: लगातार इन घटनाओं ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि ईरान, पाकिस्तान के प्रभाव में भारत विरोधी एजेंडा चला रहा है।
भारत की चुप्पी के पीछे का असली कारण? (The Strategic Silence)
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की वर्तमान खामोशी के पीछे केवल '4 भूलें' ही नहीं, बल्कि रणनीतिक संतुलन भी है:
नेतन्याहू से दोस्ती: प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से गहरी दोस्ती जगजाहिर है। इजरायल ने ही खामेनेई के ठिकानों पर 'ऑपरेशन लायंस रोर' के तहत हमले किए हैं।
ट्रंप फैक्टर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में शासन परिवर्तन का खुला समर्थन किया है। भारत अमेरिका और इजरायल जैसे अपने रणनीतिक साझेदारों को नाराज नहीं करना चाहता।
ऊर्जा सुरक्षा: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत अब खाड़ी के अन्य देशों (सऊदी अरब और यूएई) के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को मजबूत कर रहा है।