पीएम मोदी के लौटते ही ईरान पर भीषण प्रहार 48 घंटे का मौन और फिर शुरू हुआ ऑपरेशन एपिक फ्युरी
News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में तनाव अब अपने चरम पर पहुँच गया है। 4 मार्च 2026 की ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर 'Broad Wave' (भीषण लहर) के रूप में हमले शुरू कर दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह भीषण सैन्य कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल से रवानगी के ठीक 48 घंटे बाद शुरू हुई, जिसे लेकर कूटनीतिक गलियारों में '48-घंटे के मौन' (Informal Pause) की थ्योरी चर्चा में है।
1. पीएम मोदी की रवानगी और हमलों का समय (The 48-Hour Gap)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 फरवरी 2026 को इजरायल की ऐतिहासिक दो-दिवसीय यात्रा पर थे।
26 फरवरी की शाम: पीएम मोदी ने इजरायल से भारत के लिए उड़ान भरी। उनकी विदाई के समय इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू खुद एयरपोर्ट पर मौजूद थे।
28 फरवरी की सुबह: पीएम मोदी के भारत पहुँचने के कुछ ही घंटों बाद, अमेरिका और इजरायल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' (Operation Epic Fury) के तहत ईरान पर हवाई हमले शुरू कर दिए।
रणनीतिक सस्पेंस: कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और कूटनीतिक सम्मान के लिए इन हमलों को 48 घंटे तक टाला गया था।
2. 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी': ईरान के इन ठिकानों पर हुआ प्रहार (Targets)
इजरायली सेना (IDF) और अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने ईरान की कमर तोड़ने के लिए सटीक निशाना बनाया है:
नतांज परमाणु केंद्र: संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु निगरानी संस्था ने पुष्टि की है कि ईरान के मुख्य परमाणु संवर्धन केंद्र 'नतांज' को कुछ नुकसान पहुँचा है।
मिसाइल बेस: तेहरान और इस्फ़हान के पास स्थित बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन और भंडारण सुविधाओं को मलबे में तब्दील कर दिया गया है।
IAF और ड्रोन्स: इजरायली वायुसेना के F-35 स्टील्थ विमानों ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम (S-300) को पहले ही चरण में तबाह कर दिया।
3. 'खामेनेई की मौत' और नेतृत्व का संकट (Leadership Vacuum)
हमलों के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है।
मौत की पुष्टि: रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी के हमलों में खामेनेई के कार्यालय के पास भी धमाके हुए थे। 1 मार्च को उनकी मृत्यु की पुष्टि हुई।
अंतिम संस्कार: खामेनेई का पार्थिव शरीर मशहद ले जाया जाएगा, जबकि तेहरान में 4 मार्च (आज) से तीन दिवसीय शोक और विदाई समारोह शुरू हो रहा है।
4. ईरान का पलटवार और 'ट्रुथफुल प्रॉमिस 4' (Retaliation)
ईरान ने भी हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय भीषण जवाबी कार्रवाई की है:
मिसाइल वर्षा: ईरान ने इजरायल, यूएई (UAE), कतर और बहरीन पर 700 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
खाड़ी देशों पर असर: दुबई के पास अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के करीब और कतर के अल-उदैद एयरबेस पर भी मिसाइलें गिरी हैं। सऊदी अरब के तेल ठिकानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई है।
5. रक्षा तकनीक: मिसाइल डिफेंस सिस्टम की परीक्षा (Defense Technology)
इस युद्ध ने आधुनिक रक्षा प्रणालियों की क्षमता को दुनिया के सामने रख दिया है:
आयरन डोम और एरो-3: इजरायल के इन सिस्टम्स ने ईरान की 90% से अधिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।
यूएस पैट्रियट: खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल बैटरियों ने यूएई और कतर की रक्षा की।
नया मोड: पहली बार युद्ध में AI-आधारित रिएक्टिव टारगेटिंग और MQ-9 रीपर ड्रोन्स का बड़े पैमाने पर उपयोग देखा गया है।
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