सिर्फ आई-ड्रॉप काफी नहीं, आंखों की खोई हुई चमक और नमी वापस लाने के लिए आज ही बदलें ये आदतें
News India Live, Digital Desk : आजकल हम जिस दौर में जी रहे हैं, वहां दो चीजों से बचना नामुमकिन है एक हमारे हाथ में चिपका मोबाइल (स्क्रीन) और दूसरा बाहर फैला हुआ प्रदूषण। आपने गौर किया होगा कि शाम होते-होते आंखें भारी लगने लगती हैं, उनमें किरकिराहट (जैसे धूल चली गई हो) महसूस होती है या वे लाल हो जाती हैं।
अगर आपके साथ ऐसा बार-बार हो रहा है, तो संभल जाइए। यह सिर्फ थकान नहीं है, मेडिकल भाषा में इसे 'ड्राई आई सिंड्रोम' (Dry Eye Syndrome) कहा जाता है। आसान भाषा में कहें तो, आंखों का पानी सूख जाना।
आंखें 'सूखती' क्यों हैं?
हमारी आंखों के ऊपर आंसुओं की एक बहुत ही महीन परत (Layer) होती है, जो आंखों को गीला और साफ़ रखती है। लेकिन दो बड़े दुश्मन इस परत को नुकसान पहुंचा रहे हैं:
- स्क्रीन टाइम: जब हम लगातार फोन या लैपटॉप को घूरते हैं, तो हम पलक झपकना (Blink करना) भूल जाते हैं। सामान्य तौर पर हम एक मिनट में कई बार पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों में नमी बनी रहती है। लेकिन स्क्रीन देखते वक्त यह दर आधी हो जाती है। नतीजा? नमी हवा में उड़ जाती है।
- प्रदूषण और मौसम: हवा में मौजूद धूल के कण और जहरीला धुआं (Smog) आंखों की सतह को डैमेज करता है। सर्दियों की रूखी हवा भी आंखों की नमी चुरा लेती है, जिससे खुजली और जलन शुरू हो जाती है।
कैसे पहचानें कि समस्या गंभीर है? (लक्षण)
- आंखों में ऐसा लगना जैसे रेत या कंकड़ चला गया हो (Gritty feeling)।
- लगातार खुजली होना और रगड़ने का मन करना।
- धुंधला दिखाई देना।
- आंखों से बहुत ज्यादा पानी आना (जी हाँ, जब आंखें ज्यादा ड्राई होती हैं, तो शरीर रिएक्शन में ज्यादा पानी बनाता है, पर यह वो वाला पानी नहीं होता जो आंखों को नमी दे)।
- तेज़ रोशनी बर्दाश्त न कर पाना।
बचाव के आसान घरेलू उपाय
आपको तुरंत डॉक्टर बनने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन कुछ आदतों में सुधार करके आप अपनी आंखों को बचा सकते हैं:
- 20-20-20 का फॉर्मूला: अगर आप कंप्यूटर पर काम करते हैं, तो हर 20 मिनट बाद, 20 फ़ीट दूर देखें और 20 सेकंड का ब्रेक लें। अपनी पलकों को जानबूझकर बार-बार झपकाएं।
- पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी होगी तो आंसुओं का उत्पादन भी कम होगा। दिन भर में भरपूर पानी पीकर हाइड्रेटेड रहें।
- चश्मा जरूर लगाएं: जब भी घर से बाहर निकलें, तो बड़ा सनग्लास या चश्मा लगाएं। यह आपकी आंखों को सीधे ठंडी हवा और धूल के हमलों से बचाता है।
- हीटर से दूर रहें: सर्दियों में सीधे हीटर या ब्लोअर के सामने बैठने से बचें, यह हवा को सुखा देता है जिससे आंखें ड्राई हो जाती हैं।
सावधानी
अगर जलन बहुत ज्यादा हो, तो मेडिकल स्टोर से अपनी मर्जी से कोई भी 'आई ड्रॉप' खरीदकर न डालें। कुछ ड्रॉप्स में स्टेरॉयड होते हैं जो लंबे समय में आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। समस्या बढ़ने पर हमेशा नेत्र विशेषज्ञ (Eye Specialist) को दिखाएं।