मंत्री से शून्य तक का सफर ,आखिर क्यों महेंद्रजीत मालवीय ने छोड़ा था कांग्रेस का हाथ? जानिए असली वजह

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News India Live, Digital Desk : कहते हैं राजनीति में कोई किसी का स्थाई दुश्मन या दोस्त नहीं होता, और राजस्थान के महेंद्रजीत सिंह मालवीय इसका सबसे ताज़ा उदाहरण हैं। कभी कांग्रेस की रैलियों में 'हुंकार' भरने वाले और गहलोत सरकार में कद्दावर मंत्री रहे मालवीय ने जब लोकसभा चुनाव से ऐन पहले पाला बदला, तो लगा कि राजस्थान की 'वागड़ बेल्ट' की पूरी सियासत बीजेपी के पाले में चली जाएगी। लेकिन हकीकत थोड़ी अलग निकली।

क्यों छोड़ी थी कांग्रेस?
मालवीय का कांग्रेस छोड़ना केवल एक पार्टी बदलना नहीं था, बल्कि दशकों पुरानी पहचान को त्यागना था। जानकार मानते हैं कि वह कांग्रेस के भीतर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। उन्हें लग रहा था कि कांग्रेस के पास भविष्य की कोई साफ़ योजना नहीं है और 'बाप' (BAP) पार्टी की बढ़ती ताकत का मुकाबला बीजेपी के साथ जुड़कर ही किया जा सकता है। एक और कड़वा सच यह भी था कि विपक्ष में रहकर वे अपने गढ़ को बचाए रखने की चुनौती देख रहे थे।

लेकिन दांव उल्टा पड़ा या सही?
महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने जिस विश्वास के साथ बीजेपी का दामन थामकर लोकसभा का टिकट लिया, वह सपना अधूरा रह गया। चुनाव के नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए। अब बड़ा सवाल यह है कि एक बड़ा आदिवासी चेहरा, जो मंत्री पद पर रहने का आदी था, क्या अब बीजेपी में केवल एक कार्यकर्ता की तरह सिमट कर रह जाएगा?

राजनीति में 'कद' उस वक्त बढ़ता है जब आप अपनी जीत सुनिश्चित करें। फिलहाल मालवीय उस दोराहे पर खड़े हैं, जहाँ बीजेपी को उन्हें कहीं फिट करना है और उनके समर्थक भी इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि उनका 'पुराना रुतबा' वापस कब लौटेगा।

दरअसल, राजस्थान की राजनीति में अब चेहरों से ज्यादा काम और जातीय गणित बोलता है। मालवीय का अनुभव और आदिवासी समाज में उनकी पकड़ आज भी मजबूत है, लेकिन पार्टी बदलने के बाद मिलने वाले 'झटकों' ने उन्हें थोड़ा शांत रहने पर मजबूर कर दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी उन्हें राज्य की राजनीति में दोबारा बड़ा स्पेस देती है या मालवीय को अभी और लंबा 'सियासी इंतज़ार' करना पड़ेगा।