झारखंड के दागी नेताओं की अब खैर नहीं ,हाईकोर्ट ने दिखाया सख्त रुख
News India Live, Digital Desk : हम अक्सर देखते हैं कि राजनीति में आने के बाद नेताओं पर दर्ज मुकदमे या तो ठंडे बस्ते में चले जाते हैं या उनकी फाइलें धूल खाती रहती हैं। लेकिन झारखंड में अब ऐसा नहीं चलने वाला। झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने राज्य के दागी नेताओं यानी जिन सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) पर आपराधिक मामले चल रहे हैं उन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि क़ानून सबके लिए बराबर है, चाहे वो कोई आम आदमी हो या कोई 'माननीय'।
हाईकोर्ट ने CBI से क्या पूछा?
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) और राज्य सरकार से सख्त सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने उनसे सांसदों और विधायकों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की 'स्टेटस रिपोर्ट' (Status Report) मांगी है।
आसान भाषा में कहें तो, कोर्ट यह जानना चाहता है कि:
- अब तक कितने नेताओं पर केस चल रहे हैं?
- इन मुकदमों की जांच कहां तक पहुंची है?
- ट्रायल (सुनवाई) में इतनी देरी क्यों हो रही है?
- कितने मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है?
देरी पर कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत का रुख काफी सख्त दिखा। कोर्ट का मानना है कि जनप्रतिनिधियों (नेताओं) पर लगे आरोपों का निपटारा जल्द से जल्द होना चाहिए ताकि राजनीति साफ़-सुथरी रह सके। अक्सर देखा गया है कि रसूख के चलते ये मामले लटकते रहते हैं, लेकिन अब हाईकोर्ट खुद इसकी निगरानी कर रहा है।
कोर्ट ने सीबीआई और सरकार को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द पूरी जानकारी शपथ पत्र (Affidavit) के ज़रिये अदालत में पेश करें।
इसका असर क्या होगा?
हाईकोर्ट की इस सख्ती से सियासी गलियारों में हड़कंप मचना तय है।
- ट्रायल में तेज़ी: अब तक जो मामले कछुए की रफ़्तार से चल रहे थे, उनमें तेज़ी आएगी।
- दोषी नेताओं पर गाज: अगर मामलों की सुनवाई जल्दी पूरी होती है, तो कई नेताओं को सजा हो सकती है और उनकी विधायकी या सांसदी भी खतरे में पड़ सकती है।
- जनता का भरोसा: न्यायपालिका के इस कदम से आम जनता का कानून पर भरोसा और मजबूत होगा।
अब अगली सुनवाई पर सबकी नज़रें टिकी हैं कि सीबीआई अपनी रिपोर्ट में क्या खुलासे करती है और कोर्ट आगे क्या एक्शन लेता है। क्या वाकई झारखंड की राजनीति अपराध मुक्त हो पाएगी? यह वक्त बताएगा, लेकिन शुरुआत दमदार हुई है!