Jharkhand Politics : कहां गए तिजोरी के 10,000 करोड़? बाबूलाल मरांडी का सोरेन सरकार पर बड़ा हमला

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News India Live, Digital Desk: झारखंड में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य के खजाने से 10,000 करोड़ रुपये के "लापता" होने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जवाब मांगा है। मरांडी का आरोप है कि सरकार ने विकास कार्यों के नाम पर बड़ी राशि निकाली है, लेकिन धरातल पर उसका कोई असर नहीं दिख रहा है।

मरांडी का तीखा सवाल: 'विकास या लूट?'

बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सरकार से कई कड़े सवाल पूछे हैं:

खर्च का हिसाब: उन्होंने पूछा कि पिछले कुछ महीनों में जो बड़ी रकम सरकारी खजाने से निकाली गई, वह किन प्रोजेक्ट्स पर खर्च हुई?

श्वेत पत्र की मांग: बीजेपी ने मांग की है कि सरकार राज्य की वित्तीय स्थिति पर 'श्वेत पत्र' (White Paper) जारी करे ताकि जनता को पता चल सके कि उनकी गाढ़ी कमाई का पैसा कहां जा रहा है।

भ्रष्टाचार का आरोप: मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में बिचौलियों और भ्रष्टाचार का बोलबाला है, जिसके कारण जनता के हक का पैसा गलत हाथों में जा रहा है।

सरकारी खजाने (Treasury) का गणित: समझिए कैसे होता है आवंटन

किसी भी राज्य में बजट और खजाने के प्रबंधन की एक निश्चित प्रक्रिया होती है। मरांडी ने इसी प्रक्रिया में 'होल' (Loophole) होने की बात कही है।

राजस्व संग्रह: टैक्स और अन्य स्रोतों से पैसा 'संचित निधि' (Consolidated Fund) में आता है।

बजट आवंटन: विधानसभा से पारित होने के बाद विभागों को फंड जारी होता है।

विपक्ष की भूमिका: विपक्ष का काम यह निगरानी करना है कि क्या आवंटन और वास्तविक खर्च (Expenditure) के आंकड़ों में कोई अंतर है।

सोरेन सरकार का पलटवार: 'विपक्ष की हताशा'

इधर, सत्ताधारी दल JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार के प्रवक्ताओं का कहना है कि:

बीजेपी हार के डर से आधारहीन आरोप लगा रही है।

सारा पैसा जन कल्याणकारी योजनाओं जैसे 'मईंया सम्मान योजना' और बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किया जा रहा है।

राज्य की वित्तीय स्थिति पूरी तरह पारदर्शी और नियंत्रण में है।

क्या होगा चुनावी असर?

झारखंड में भ्रष्टाचार हमेशा से एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। 10,000 करोड़ रुपये का यह नया आंकड़ा चुनावी रैलियों में गूंजने वाला है। जनता के बीच यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है कि क्या वाकई खजाने में कोई सेंध लगी है या यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप है।