Jharkhand Politics : शपथ, सन्नाटा या शोर? विधानसभा के पहले सत्र में क्या होने वाला है, पक्ष विपक्ष ने कसी कमर

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News India Live, Digital Desk : झारखंड की सियासत में चुनाव का शोर तो थम गया है, नई सरकार बन गई है, लेकिन असली 'एक्शन' अभी शुरू होना बाकी है। सभी की निगाहें कैलेंडर की एक तारीख पर टिकी हैं, और वो तारीख है  5 दिसंबर 2025

क्यों? क्योंकि इसी दिन से झारखंड विधानसभा (Jharkhand Assembly) का पहला सत्र शुरू होने जा रहा है। वैसे तो इसे छोटा सत्र माना जा रहा है, लेकिन राजनीति के जानकार बता रहे हैं कि ये सत्र छोटा भले हो, पर धमाका बड़ा होगा।

क्या होने वाला है 5 दिसंबर से?

सबसे पहले तो आपको बता दें कि चुनाव जीतने के बाद यह नई सरकार का पहला आधिकारिक मिलन होगा। 5 दिसंबर से शुरू होकर यह सत्र 9 दिसंबर तक चलेगा। इन चार दिनों में झारखंड के भविष्य की नींव रखी जाएगी।

  • शपथ ग्रहण (Oath Taking): सबसे पहले तो हमारे नए-नए चुनकर आए माननीय विधायक (MLAs) अपनी कुर्सी की शपथ लेंगे। प्रोटेम स्पीकर उन्हें शपथ दिलाएंगे।
  • स्पीकर का चुनाव: इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर का चुनाव होगा, जो सदन की कार्यवाही चलाएंगे।

हंगामे के पूरे आसार!

सदन की कार्यवाही सिर्फ़ रस्म-अदायगी तक सीमित नहीं रहेगी। विपक्ष, यानी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों ने अभी से अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। हार के बावजूद विपक्ष यह जताना चाहता है कि वो कमजोर नहीं है।

किन मुद्दों पर घिरेगी सरकार?

आम जनता, यानी आप और हम जिस चीज़ का इंतजार कर रहे हैं, वो है— वादों पर अमल।

  1. मंईयां सम्मान योजना (Maiya Samman Yojana): चुनाव के दौरान इस योजना की खूब चर्चा थी। अब महिलाएं इंतजार कर रही हैं कि सरकार इस पर कोई नया अपडेट या बजट लाए। विपक्ष भी पूछेगा— "बताइए, पैसा कब आएगा?"
  2. रोजगार और परीक्षाएं: झारखंड में युवाओं के लिए नौकरी और परीक्षा एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ेगा।
  3. बांग्लादेशी घुसपैठ: चुनाव प्रचार में यह मुद्दा काफी गरम था। सदन के अंदर भी इसकी गूंज सुनाई देने की पूरी संभावना है।

हेमंत सरकार की तैयारी

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) और सत्ता पक्ष भी पूरी तरह तैयार हैं। राज्यपाल के अभिभाषण के जरिए सरकार अपना रोडमैप पेश करेगी। सरकार की कोशिश होगी कि पहले सत्र में शांति बनी रहे और वे जनता को यह संदेश दे सकें कि "हम काम करने आए हैं, शोर मचाने नहीं।"

हमारी बात

लोकतंत्र में विधानसभा का सत्र सिर्फ नेताओं की बहस के लिए नहीं, बल्कि आपके मुद्दों को सुलझाने के लिए होता है। देखना दिलचस्प होगा कि 5 दिसंबर से शुरू होने वाली इस 'राजनीतिक वेब सीरीज' के पहले एपिसोड में कौन बाजी मारता है सरकार या विपक्ष?