Jharkhand Politics: नारी शक्ति वंदन अधिनियम को कांग्रेस ने बताया सियासी पैंतरा, राकेश सिन्हा का बड़ा हमला
News India Live, Digital Desk: झारखंड की राजनीति में महिला आरक्षण और 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने केंद्र सरकार के इस कानून को महिलाओं के साथ एक 'बड़ा मजाक' और 'सियासी जुमला' करार दिया है। सिन्हा ने कहा कि भाजपा सरकार इस अधिनियम के जरिए आगामी चुनावों में महिलाओं का वोट तो हासिल करना चाहती है, लेकिन वास्तव में उन्हें उनका अधिकार देने की मंशा नहीं रखती।
"2029 तक का इंतजार क्यों?": राकेश सिन्हा का सवाल
राकेश सिन्हा ने रांची में मीडिया से बात करते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती थी, तो इसे तत्काल प्रभाव से लागू क्यों नहीं किया गया? सिन्हा ने तर्क दिया कि जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की शर्त लगाकर सरकार ने इस कानून को अनिश्चितकाल के लिए लटका दिया है। उनके अनुसार, "यह कानून महिलाओं के हाथ में लड्डू नहीं, बल्कि एक झुनझुना है, जिसका लाभ उन्हें 2029 से पहले मिलना नामुमकिन है।"
जातीय जनगणना की मांग पर दिया जोर
कांग्रेस प्रवक्ता ने इस दौरान अपनी पार्टी की पुरानी मांग को दोहराते हुए कहा कि बिना जातीय जनगणना के महिला आरक्षण अधूरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस कानून के जरिए ओबीसी (OBC) और दलित महिलाओं के हक को छीनने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस की मांग है कि आरक्षण के भीतर 'कोटा विद इन कोटा' सुनिश्चित किया जाए ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं को भी नेतृत्व का मौका मिल सके।
झारखंड भाजपा का पलटवार
कांग्रेस के इस हमले पर झारखंड भाजपा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने दशकों तक महिला आरक्षण बिल को लटकाए रखा और अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हकीकत में बदला है, तो कांग्रेस अपनी खिसकती जमीन को देख बौखला गई है। भाजपा ने कहा कि यह कानून ऐतिहासिक है और इससे देश के लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी का नया युग शुरू होगा।
चुनावी बिसात और महिला वोट बैंक
झारखंड में आने वाले चुनावों को देखते हुए महिला मतदाताओं की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। एक तरफ भाजपा इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसे 'चुनावी लॉलीपॉप' बताकर महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। राकेश सिन्हा का यह बयान इसी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।