Jharkhand Municipal Election : मेयर पदों पर आरक्षण के खिलाफ याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने साफ किया चुनावी रास्ता

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News India Live, Digital Desk: झारखंड में काफी समय से थमे नगर निकाय चुनावों को लेकर एक बड़ी अड़चन दूर हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट ने मेयर (महापौर) पदों के लिए राज्य सरकार की आरक्षण नीति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब राज्य में निकाय चुनाव कराने का रास्ता पूरी तरह साफ माना जा रहा है।

झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने शांतनु कुमार चंद्र द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि याचिका में कोई ठोस तथ्य नहीं हैं।

धनबाद और गिरिडीह मेयर पद के आरक्षण पर था विवाद

दरअसल, याचिकाकर्ता शांतनु कुमार चंद्र ने धनबाद और गिरिडीह नगर निगम में महापौर पदों के लिए तय की गई आरक्षण नीति पर सवाल उठाए थे। याचिका में दलील दी गई थी कि सरकार ने इन दो महत्वपूर्ण शहरी स्थानीय निकायों में पदों के आवंटन के लिए जो नीति बनाई है, वह त्रुटिपूर्ण और तर्कहीन है।

याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह था कि सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया संवैधानिक और तकनीकी रूप से सही नहीं है, इसलिए इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।

2011 की जनगणना को बनाया गया था आधार

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि महापौर पदों के लिए आरक्षण का निर्धारण वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। याचिका में कहा गया था कि 2011 की जनगणना अब बहुत पुरानी हो चुकी है और जनसंख्या के वर्तमान स्वरूप में काफी बदलाव आ चुका है। ऐसे में पुराने आंकड़ों के आधार पर आरक्षण तय करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुना। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता अपनी दलीलों के समर्थन में कोई भी ऐसा मजबूत या ठोस तथ्य (Solid Facts) पेश करने में विफल रहे, जिससे सरकार की नीति को गलत ठहराया जा सके। हाईकोर्ट ने माना कि केवल जनगणना के पुराना होने के आधार पर चुनावी प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जा सकता। अंततः कोर्ट ने याचिका को योग्यताहीन मानते हुए खारिज कर दिया।